टा स्टील के सीईओ टीवी नरेंद्रन ने कहा, चीन जैसे देशों के सस्ते इंपोर्ट से घरेलू स्टील इंडस्ट्री को नुकसान हो रहा है. सरकार को इस बारे में ठोस कदम उठाने चाहिए.

Cheap Steel Imports Affecting Domestic Industry says Tata Steel CEO : विदेशों, खास तौर पर चीन से होने वाले सस्ते स्टील के इंपोर्ट से देश की स्टील इंडस्ट्री को काफी नुकसान हो रहा है और पूरी इंडस्ट्री इस बारे में सरकार की तरफ से ठोस कदम उठाए जाने का इंतजार कर रही है. यह बात टाटा स्टील के सीईओ टीवी नरेंद्रन (T V Narendran) ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कही. उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया और इंपोर्ट में बढ़ोतरी इसी तरह जारी रही, तो देश के स्टील सेक्टर में होने वाले इनवेस्टमेंट पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा. 

प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने में स्टील इंडस्ट्री आगे : नरेंद्रन

टीवी नरेंद्रन ने कहा कि पिछले कुछ बरसों के दौरान स्टील इंडस्ट्री सबसे ज्यादा प्राइवेट इनवेस्टमेंट करने वाले उद्योगों में शामिल रही है. इंडस्ट्री के सभी उत्पादकों ने विस्तार की बड़ी योजनाओं का एलान किया है. इन विस्तार योजनाओं का पहला राउंड पूरा होने वाला है. लेकिन सस्ते इंपोर्ट की मार इसी तरह पड़ती रही, तो भविष्य में होने वाले निवेश पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.

स्टील कंपनियों के कैश फ्लो पर असर : नरेंद्रन

राजधानी दिल्ली में आयोजित ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के 69वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने आए नरेंद्रन ने कहा कि चीन समेत दुनिया के कई हिस्सों में बनाए जा रहे बहुत सारे स्टील की जब कहीं और खपत नहीं हो पा रही है, तो उसे भारतीय बाजारों में डंप किया जा रहा है. इससे भारत में स्टील की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि कीमतों पर पड़ रहा यह दबाव अब इस लेवल पर पहुंच गया है, जिससे स्टील कंपनियों के लिए कैश फ्लो का सही स्तर बनाए रख पाना मुश्किल होता जा रहा है. टीवी नरेंद्रन AIMA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट भी हैं.

स्टील कंपनियों की मांग, सरकार करे कार्रवाई

देश के सबसे बड़े स्टील उत्पादकों में शामिल टाटा स्टील के सीईओ की यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत सरकार ने 2030 तक देश में स्टील का उत्पादन बढ़ाकर 300 मिलियन टन पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. सरकार के इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश की तमाम बड़ी स्टील कंपनियों की क्षमता विस्तार की घोषित योजनाओं का पूरा होना जरूरी है. स्टील और स्टेनलेस स्टील इंडस्ट्री से जुड़ी प्रमुख कंपनियां सरकार के सामने लगातार इस मुद्दे को उठाती रही हैं.

स्टील एसोसिएशन ने भी लगाई है गुहार

भारतीय कंपनियों का कहना है कि खास तौर पर चीन से बढ़ रहे स्टील इंपोर्ट के कारण भारतीय उद्योग पर बुरा असर पड़ रहा है. इंडियन स्टील एसोसिएशन (ISA) ने इस सिलसिले में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज़ (DGTR) के पास एप्लीकेशन भी दाखिल किया है, जिसकी फिलहाल समीक्षा की जा रही है. टीवी नरेंद्रन ने इस संदर्भ में कहा कि “हमने सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया है. हमें उम्मीद है कि सरकार ने हमारी बात सुनी है और जल्द ही कोई कदम उठाएगी. हम इस पर सरकार की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं.”

स्टील इंपोर्ट के बढ़ते आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 के पहले 10 महीनों यानी अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 के दौरान भारत का स्टील एक्सपोर्ट 28.9% गिरकर 3.99 मिलियन टन रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 5.61 मिलियन टन था. दूसरी तरफ, इसी अवधि के दौरान देश के स्टील इंपोर्ट में 20% से अधिक इजाफा हो गया और यह 8.29 मिलियन टन पर जा पहुंचा.