भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की संभावनाएं तेज़, लेकिन घरेलू हित सर्वोपरि: वित्त मंत्री सीतारमण

9 जुलाई की अमेरिकी टैरिफ डेडलाइन से पहले भारत ने बढ़ाई सक्रियता

अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने की 9 जुलाई की डेडलाइन करीब आ रही है। इसी बीच भारत सरकार अमेरिका के साथ एक व्यापक, पारस्परिक लाभकारी व्यापार समझौते के लिए तैयार दिखाई दे रही है। हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता तभी संभव होगा जब भारत की घरेलू प्राथमिकताओं और संवेदनशील क्षेत्रों — विशेष रूप से कृषि और पशुपालन — का सम्मान किया जाएगा।

भारत को चाहिए “बड़ा, अच्छा और सुंदर समझौता”

द फाइनेंशियल एक्सप्रेस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में सीतारमण ने कहा, “हम एक बड़ा, अच्छा और सुंदर समझौता करना चाहेंगे, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन यह समझौता समानता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित होना चाहिए।” उनका यह बयान उस समय आया है जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत के साथ व्यापार समझौता अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल देगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार घाटे, बाजार पहुंच, कृषि सब्सिडी और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे कई मुद्दों पर बातचीत चल रही है।

कृषि और डेयरी सेक्टर भारत की ‘लाल रेखाएं’

वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत किसानों और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “कृषि और डेयरी सेक्टर भारत के लिए अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र हैं। ये हमारी बड़ी ‘रेड लाइन’ हैं, जिन पर हम किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।”

भारत लंबे समय से डेयरी क्षेत्र की रक्षा करता आया है, जो ग्रामीण आजीविका और सामाजिक संरचना का अभिन्न हिस्सा है। अमेरिका द्वारा डेयरी उत्पादों के लिए अधिक बाजार पहुंच की मांग भारत के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है।

‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य के तहत वैश्विक साझेदारियां अहम

सीतारमण ने जोर देकर कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है, और इस दिशा में मजबूत वैश्विक साझेदारियों की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हम एक ऐसे मोड़ पर हैं जहां अमेरिका जैसी वैश्विक शक्तियों के साथ आर्थिक समझौते हमारे दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के लिए बेहद जरूरी हैं। लेकिन ये साझेदारियां भारत की शर्तों और प्राथमिकताओं के अनुसार होनी चाहिए।”

बातचीत जारी, समझौते के लिए लचीलापन जरूरी

भारत और अमेरिका के बीच पिछली कई वर्षों से व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवाद चलते रहे हैं। हालांकि हालिया वर्षों में दोनों पक्षों ने कई मुद्दों को सुलझाने के लिए संवाद बढ़ाया है। भारत ने कई बार संकेत दिए हैं कि वह मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर अब अधिक व्यावहारिक रुख अपना रहा है, लेकिन इसमें घरेलू उद्योगों की रक्षा प्राथमिकता बनी रहेगी।