महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ को भारत के लिए एक नए युग की शुरुआत का अवसर करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1991 का विदेशी मुद्रा संकट भारत में आर्थिक उदारीकरण की नींव बना था, उसी तरह मौजूदा वैश्विक व्यापार संकट भारत के लिए एक सकारात्मक परिवर्तन का कारण बन सकता है।

महिंद्रा ने यूरोप और कनाडा का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे इन देशों ने टैरिफ की चुनौतियों के बीच आंतरिक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप में रक्षा खर्च में वृद्धि और कनाडा में प्रांतीय व्यापार बाधाओं को हटाने की दिशा में हो रहे प्रयास ‘अप्रत्यक्ष रूप से’ दीर्घकालिक लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। भारत को भी इस मोड़ का उपयोग करते हुए ऐसे ही सकारात्मक बदलाव लाने चाहिए।

उन्होंने भारत में व्यापार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर ज़ोर देते हुए एक प्रभावी और तेज़ सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू करने की अपील की। महिंद्रा ने पर्यटन को देश का सबसे कम उपयोग किया गया विदेशी मुद्रा और रोज़गार का स्रोत बताया और कहा कि इसे विकसित कर भारत को नई आर्थिक ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।

महिंद्रा ने MSMEs के लिए नकदी सहायता, इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, PLI स्कीम का विस्तार, और निर्माण इनपुट्स पर आयात शुल्क कम करने जैसे कई अहम सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि अगर भारत इन रणनीतिक सुधारों को अपनाता है, तो यह न केवल वैश्विक पूंजी के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था में भी एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।