भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी राष्ट्रपति दौरे के दौरान भारत वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री को लेकर अहम चर्चा कर सकता है। इस संभावित डील की अनुमानित कीमत करीब ₹6000 करोड़ बताई जा रही है, जो दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को और गहरा कर सकती है।
BrahMos Missile भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे दुनिया की सबसे तेज और सटीक मिसाइल प्रणालियों में गिना जाता है। इसकी मारक क्षमता और आधुनिक तकनीक इसे वैश्विक स्तर पर अत्यधिक आकर्षक बनाती है, खासकर उन देशों के लिए जो अपनी समुद्री और तटीय सुरक्षा को मजबूत करना चाहते हैं।
वियतनाम के लिए यह डील रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता है। भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना वियतनाम की “एक्ट ईस्ट” नीति और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह समझौता होता है तो यह भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ उसे एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में स्थापित करेगा। भारत पहले ही कई देशों के साथ रक्षा उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, और ब्रह्मोस मिसाइल इस रणनीति का एक अहम हिस्सा बन चुकी है।
भारत और वियतनाम के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और रणनीतिक सहयोग तेजी से बढ़ा है। दोनों देश समुद्री सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में पहले से ही मिलकर काम कर रहे हैं। यह संभावित डील उस साझेदारी को और मजबूत कर सकती है।
हालांकि, इस सौदे को लेकर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राष्ट्रपति दौरे के दौरान इस पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह समझौता आगे बढ़ता है, तो यह न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर भी इसका असर पड़ सकता है।