अक्टूबर–नवम्बर की बुआइ का समय खत्म होते ही ज्यादातर प्याज की खेती करने वाले किसान अपने खेत की तयारी और पौधो की रोपाइ पूरी कर चुके है। प्याज एक संवेदनशील और महंगी फसल है, इसलिये बोइ, सिंचाइ या कीट नियंत्रण धानुका एग्रीटेक ने प्याज फसल के लिए वैज्ञानिक समाधान सुझाएमे छोटी-सी गलती भी बड़ा नुक्सान कर सकती है। किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिये धानुका एग्रीटेक कुछ जरूरी सुझाव देता है। अचानक मौसम बदलना, फफूंदी के रोग और खरपतवार भी फसल की सेहत और गुणवता के लिए खतरा बनते हैं। अच्छी और लाभदायक पैदावर पाने के लिए किसानो को सही बोवाइ के तरीके अपनाने और समय पर असरदार उपाय करने चाहिए। किसानों को बीमारी-रहित बीज और अच्छी तरह पानी निकालने वाली बलुई-दोमट मिट्टी का उपयोग करना चाहिए।
प्याज की फसल में पोषक तत्वों का असंतुलन, खासकर फॉस्फोरस (P), जिंक (Zn) और आयरन (Fe) की कमी, अक्सर कमजोर जड़ें, पत्तियों में कम हरियाली और छोटे गाठ (बल्ब) बनने का कारण बनता है, जिससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों घट जाती हैं। माइकोराइज़ा फफूंद, खासकर एंडो-माइकोराइज़ा, प्याज की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध बनाती है। यह जड़ों के बाहर एक बड़ा जाल बनाती है, जिससे जड़ें ज्यादा क्षेत्र से पोषक तत्व सोख पाती हैं। इससे फॉस्फोरस जैसे कम चलने वाले पोषक तत्व आसानी से घुलकर उपलब्ध होते हैं और जिंक, कॉपर और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का अवशोषण भी बढ़ता है।
एंडो-माइकोराइज़ा “ग्लोमेलिन” नाम का पदार्थ भी छोड़ती है, जो मिट्टी को मजबूती देती है और पोषक तत्वों को पकड़े रखने में मदद करता है। यह पौधे के हार्मोन (ऑक्सिन और साइटोकिनिन) को संतुलित करके बेहतर जड़ विकास में भी मदद करती है। शोध बताते हैं कि ए.एम. फफूंद लगाने से फॉस्फोरस लेने की क्षमता 30–40% तक बढ़ सकती है, जिससे प्याज की गाठ का आकार, सूखा पदार्थ (ड्राई मैटर) और तनाव झेलने की क्षमता काफी बढ़ जाती है।
प्याज की फसल में खरपतवार शुरुआती 30–40 दिनों में मिट्टी की नमी और पोषक तत्व छीनकर फसल को कमजोर करते हैं। चौड़ी पत्ती और घास दोनों तरह के खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए 2–3 पत्ती अवस्था पर क्विजालोफॉप-इथाइल (4%) + ऑक्सीफ्लोर्फेन (6%) EC का छिड़काव असरदार होता है। यह मिश्रण तेजी से और लंबे समय तक खरपतवार दबाव कम करता है, जिससे प्याज की गाँठ बनने, फसल की सेहत और कीट नियंत्रण में सुधार होता है। खरपतवारनाशी मिश्रण , क्विज़ालोफॉप-इथाइल (4%) + ऑक्सीफ्लोर्फेन (6%) EC का छिड़काव किया जा सकता है।
ज्यादा सिंचाई करने से प्याज सड़ने लगते हैं, जबकि कम नमी होने पर छोटी गाँठ (बल्ब) बनती है। किसानों को चाहिए कि वे नियंत्रित सिंचाई से मिट्टी में नमी बराबर रखें और किसी भी चरण में पानी रुकने न दें। सही समय पर बोवाई, साफ खेत और उचित रोग-नियंत्रण उपाय अपनाकर किसान अपनी प्याज की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और इस सीजन में बेहतर, उच्च-गुणवत्ता वाली पैदावार पा सकते हैं।