वोडाफोन आइडिया के हर पांच में से एक से ज्यादा ग्राहक निष्क्रिय हैं, आईआईएफएल की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। ट्राई के आंकड़ों पर आधारित इस विश्लेषण के मुताबिक कंपनी के वास्तविक सक्रिय यूज़र्स की संख्या, कंपनी के अपने दावों से काफी कम है।
सब्सक्राइबर बेस और इनएक्टिव यूज़र
आईआईएफएल कैपिटल के अनुसार जून–सितंबर तिमाही में वोडाफोन आइडिया ने 197.2 मिलियन सब्सक्राइबर होने का दावा किया, जबकि इन में से केवल लगभग 154.7 मिलियन यूज़र ही वास्तव में नेटवर्क पर एक्टिव हैं। यानी कंपनी के कुल रिपोर्टेड बेस का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ऐसे ग्राहकों का है जो राजस्व नहीं दे रहे, जिससे कंपनी के दावों और असल पेड यूज़र बेस के बीच बड़ा अंतर दिखता है।
हाई वैल्यू बेस और 2G यूज़र
रिपोर्ट में यह संकेत है कि यदि 2G यूज़र्स को हटाकर केवल डेटा और हाई-वैल्यू सेगमेंट को देखा जाए, तो वोडाफोन आइडिया का 154 मिलियन का एक्टिव बेस और भी सिकुड़ जाता है। इससे साफ होता है कि कंपनी के पास सीमित और दबाव में चल रहा हाई-वैल्यू ग्राहक वर्ग बचा है, जो भविष्य की ग्रोथ और अपग्रेड्स के लिए पर्याप्त नहीं दिखता।
एआरपीयू की असल तस्वीर
कंपनी के हिसाब से 2025 की दूसरी तिमाही में वोडाफोन आइडिया का एआरपीयू 167 रुपये था, जो एयरटेल के 256 रुपये और जियो के 211 रुपये से काफी कम है। लेकिन जब आईआईएफएल ने केवल एक्टिव सब्सक्राइबर्स और लो-रिवेन्यू एमटूएम सिम को हटाकर एआरपीयू निकाला, तो वीआई का एआरपीयू लगभग 209 रुपये तक पहुंच गया, जबकि जियो का रिकैलकुलेटेड एआरपीयू करीब 220 रुपये रहा, यानी कम यूज़र होने के बावजूद मौजूद पेड कस्टमर से कमाई उतनी बुरी नहीं है।
वॉइस यूज़ेज और एंगेजमेंट
ट्राई के ताज़ा आंकड़े दिखाते हैं कि वोडाफोन आइडिया के एक्टिव ग्राहक भी वॉइस इस्तेमाल के मामले में प्रतिद्वंद्वियों से काफी पीछे हैं। प्रति एक्टिव यूज़र के आधार पर कंपनी का मासिक वॉइस यूज़ेज लगभग 746 मिनट के आसपास आंका गया है, जबकि एयरटेल और जियो दोनों के लिए यह आंकड़ा 1000 मिनट से ऊपर है, जिससे भारत जैसे वॉइस-ड्रिवन मार्केट में वीआई की एंगेजमेंट कमीज़ोर नज़र आती है।
अक्टूबर 2025 में ट्राई डेटा
ट्राई की अक्टूबर 2025 वायरलेस रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक महीने में वोडाफोन आइडिया ने करीब 2.08 मिलियन मोबाइल यूज़र खो दिए, जो निजी टेलिकॉम कंपनियों में सबसे खराब प्रदर्शन है। इसी अवधि में रिलायंस जियो ने लगभग 2.0 मिलियन से ज्यादा और एयरटेल ने करीब 1.2–2.0 मिलियन के बीच नए यूज़र जोड़े, जिससे मार्केट की ग्रोथ एक तरफ बढ़ रही है जबकि वीआई का बेस सिकुड़ता जा रहा है।
एक्टिव (VLR) बेस का रुझान
यदि केवल वीएलआर या एक्टिव सब्सक्राइबर बेस को देखा जाए तो तस्वीर और भी स्पष्ट हो जाती है। रिपोर्टों में बताया गया है कि जहां जियो ने एक्टिव बेस में लगभग 3.9 मिलियन और एयरटेल ने करीब 2.8 मिलियन यूज़र जोड़े, वहीं वोडाफोन आइडिया ने इसी अवधि में लगभग 0.4 मिलियन एक्टिव यूज़र और गंवा दिए।
फिक्स्ड लाइन और ब्रॉडबैंड
फिक्स्ड लाइन, फाइबर ब्रॉडबैंड और एफडब्लूए के मोर्चे पर भी वही पैटर्न नज़र आता है। जियो एफटीटीएच और एफडब्लूए में आक्रामक गति से विस्तार कर रहा है, एयरटेल स्थिर लेकिन लगातार ग्रोथ दिखा रहा है, जबकि वोडाफोन आइडिया इन सेगमेंट्स में लगभग न के बराबर मौजूदगी के साथ केवल दर्शक की तरह दिखता है।
समग्र स्थिति
इन सभी आंकड़ों से संकेत मिलता है कि वोडाफोन आइडिया का वास्तविक पेड और एक्टिव यूज़र बेस कंपनी के रिपोर्टेड नंबरों से काफी छोटा है। कंपनी मौजूदा एक्टिव ग्राहकों से ठीक-ठाक स्तर की कमाई तो कर रही है, लेकिन बेस लगातार घटने, सीमित हाई-वैल्यू यूज़र्स, कमजोर वॉइस एंगेजमेंट और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड से लगभग बाहर रहने की वजह से भविष्य की ग्रोथ और निवेश क्षमता पर गंभीर दबाव बना हुआ है।
