भारत सरकार ने देश में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए लगभग 10,000 मेगावाट कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता के निर्धारित रखरखाव शटडाउन को जुलाई तक टालने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब गर्मियों के दौरान बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है और सरकार आपूर्ति बाधित होने का कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में इन तापीय बिजली संयंत्रों को अप्रैल से जून के बीच निर्धारित रखरखाव के लिए अस्थायी रूप से बंद किया जाना था, लेकिन मौजूदा मांग को देखते हुए यह प्रक्रिया तीन महीने के लिए स्थगित कर दी गई है। इस फैसले का उद्देश्य पीक समर सीजन के दौरान ग्रिड में पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस वर्ष भारत की पीक बिजली मांग लगभग 271 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जो पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अधिक है। भीषण गर्मी, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि और घरेलू बिजली खपत में बढ़ोतरी को इस उछाल का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाने वाला एक अन्य कारक गैस आधारित बिजली उत्पादन में कमी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 8,000 मेगावाट गैस-आधारित क्षमता ऊंची ईंधन लागत और आपूर्ति चुनौतियों से प्रभावित है, जिससे कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अल्पकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक रखरखाव टालना तकनीकी जोखिम भी पैदा कर सकता है। तापीय बिजली संयंत्रों के लिए नियमित रखरखाव आवश्यक होता है ताकि उपकरणों की दक्षता बनी रहे और अनियोजित तकनीकी खराबियों से बचा जा सके।
सरकार ने साथ ही यह भी बताया है कि अप्रैल से जून के बीच 22 गीगावाट से अधिक नई बिजली क्षमता जोड़ने की योजना है, जिसमें थर्मल, सोलर, विंड, बैटरी स्टोरेज और हाइड्रो प्रोजेक्ट शामिल हैं। इससे आने वाले महीनों में बिजली आपूर्ति की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।
ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि भारत फिलहाल ऊर्जा सुरक्षा और हरित ऊर्जा संक्रमण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रहा है। एक ओर देश नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर बढ़ती मांग के चलते कोयला आधारित उत्पादन अभी भी बिजली आपूर्ति का मुख्य आधार बना हुआ है।
कुल मिलाकर, 10,000 मेगावाट कोयला आधारित क्षमता के रखरखाव को जुलाई तक टालने का फैसला यह दर्शाता है कि भारत फिलहाल बिजली आपूर्ति को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि गर्मियों में देशभर में निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा सके।