भारत अब आधुनिक युद्धक्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत देश स्वदेशी सैन्य एआई क्षमताओं के विकास पर बड़ा निवेश करने की तैयारी में है। इसी कड़ी में घरेलू एआई स्टार्टअप्स और रक्षा मंत्रालय के बीच एक महत्वपूर्ण सहयोग की योजना सामने आई है।

सूत्रों के अनुसार, Sarvam AI सहित कई स्वदेशी एआई कंपनियां रक्षा मंत्रालय के साथ उन्नत स्तर की बातचीत कर रही हैं। इस प्रस्ताव के तहत लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) स्थापित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों के लिए अत्याधुनिक एआई समाधान विकसित करना है।

इस प्रस्तावित सेंटर का मुख्य फोकस सैन्य अभियानों में एआई के उपयोग को बढ़ावा देना होगा। इसमें निगरानी (surveillance), खुफिया जानकारी का विश्लेषण (intelligence analysis), स्वायत्त ड्रोन संचालन, साइबर सुरक्षा और युद्ध रणनीति तैयार करने जैसे क्षेत्रों में तकनीकी विकास शामिल होगा। एआई आधारित सिस्टम्स से सेना को रियल-टाइम निर्णय लेने, खतरे की पहचान करने और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डेटा, एल्गोरिद्म और स्वचालित प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी। ऐसे में भारत का यह कदम वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

रक्षा क्षेत्र में एआई का उपयोग न केवल युद्ध की रणनीतियों को बदल सकता है, बल्कि सैनिकों की सुरक्षा भी बढ़ा सकता है। उदाहरण के तौर पर, एआई-संचालित ड्रोन खतरनाक इलाकों में बिना मानव हस्तक्षेप के निगरानी कर सकते हैं, जिससे जोखिम कम होता है। इसके अलावा, डेटा एनालिटिक्स के जरिए दुश्मन की गतिविधियों का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है।

सरकार का जोर इस बात पर है कि ये सभी तकनीकें पूरी तरह से स्वदेशी हों, ताकि विदेशी निर्भरता कम की जा सके। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

हालांकि, रक्षा क्षेत्र में एआई के बढ़ते उपयोग को लेकर नैतिक और सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। स्वायत्त हथियार प्रणालियों के इस्तेमाल, डेटा सुरक्षा और मानव नियंत्रण जैसे मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर बहस जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के उपयोग के साथ स्पष्ट नीतियां और सख्त नियमन भी जरूरी होंगे।

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