भारतीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप्स अब केवल घरेलू बाज़ार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। देश के कई युवा संस्थापक अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व जैसे क्षेत्रों से बड़ी पूंजी जुटा रहे हैं। इसका उपयोग वे ऐसे टेक्नोलॉजी समाधान और उत्पाद बनाने में कर रहे हैं, जिनकी मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास विशाल टेक टैलेंट पूल और अपेक्षाकृत कम लागत पर नवाचार करने की क्षमता है। यही वजह है कि वैश्विक निवेशक भारतीय स्टार्टअप्स में भारी रुचि दिखा रहे हैं। हेल्थकेयर, फिनटेक, शिक्षा और ऑटोमेशन जैसे सेक्टरों में भारतीय कंपनियां प्रतिस्पर्धी उत्पाद तैयार कर रही हैं, जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों और विदेशी उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को पूरा कर रहे हैं।
इस तेज़ प्रगति को देखते हुए उद्योग जगत मानता है कि भारतीय एआई संस्थापक आने वाले वर्षों में “मेड इन इंडिया, फॉर द वर्ल्ड” रणनीति को और मज़बूत करेंगे। इससे भारत न केवल तकनीकी विकास में अग्रणी बनेगा, बल्कि वैश्विक टेक अर्थव्यवस्था में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
