भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अगस्त में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को हालिया आर्थिक आंकड़ों से मजबूती मिली है

जून महीने में खुदरा महंगाई दर घटकर 2.1% पर आ गई है, जो पिछले 6 सालों में सबसे निचला स्तर है और यह RBI के 4% लक्ष्य से काफी नीचे है। इसके साथ ही कोर महंगाई (जिसमें खाद्य और ईंधन को शामिल नहीं किया जाता) भी नियंत्रित बनी हुई है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि देश में मांग कमजोर हो रही है। ऐसे में अब यह संभावनाएं तेज़ हो गई हैं कि RBI अगली मौद्रिक नीति बैठक में, संभवतः अगस्त में, ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है।

जून में RBI ने पहले ही रेपो रेट में 50 आधार अंकों की कटौती की थी और मौद्रिक नीति रुख को ‘तटस्थ’ कर दिया था। अब कई विश्लेषकों का मानना है कि अगस्त में RBI रेपो रेट को 5.25% तक ला सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगली कटौती सितंबर या अक्टूबर तक टल सकती है, लेकिन महंगाई में आई गिरावट ने अगस्त में कटौती की संभावना को और मजबूत किया है

ब्याज दरों में कटौती से उपभोक्ताओं और व्यापारों के लिए कर्ज सस्ता हो जाएगा, जिससे रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और निजी निवेश जैसे क्षेत्रों को गति मिल सकती है। RBI का लक्ष्य है कि वह महंगाई को नियंत्रण में रखते हुए आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करे, और इसके लिए वह आंकड़ों के आधार पर आगे की नीति तय करेगा। फिलहाल, सभी की नजरें अगस्त की बैठक पर टिकी हैं, जहां RBI भविष्य की दिशा स्पष्ट कर सकता है।