भारत में तेज इंटरनेट स्पीड के लिए वाई-फाई 6ई और वाई-फाई 7 का इंतजार अब और लंबा हो सकता है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 6 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बैंड के निचले हिस्से को डीलाइसेंस करने के नियमों की अधिसूचना में देरी कर दी है। इस स्पेक्ट्रम के आवंटन से देश में वाई-फाई 6ई और 7 जैसी उन्नत तकनीकों को लागू करने का रास्ता खुलता, जो मौजूदा वाई-फाई की तुलना में करीब 10 गुना तेज इंटरनेट स्पीड उपलब्ध कराती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों में देरी से न केवल घरों और दफ्तरों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी पर असर पड़ेगा, बल्कि भारत के डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी जैसे अभियानों की गति भी धीमी हो सकती है।
आईटी और टेलीकॉम इंडस्ट्री लंबे समय से 6 गीगाहर्ट्ज बैंड को डीलाइसेंस करने की मांग कर रही है, ताकि अधिक डिवाइस बिना इंटरफेरेंस के बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान कर सकें। अमेरिका, यूरोप और कई एशियाई देशों में यह बैंड पहले ही अनलाइसेंस्ड कर दिया गया है, जिससे वहां हाई-स्पीड वाई-फाई सर्विसेज तेजी से अपनाई जा रही हैं। उद्योग जगत का कहना है कि भारत में इस देरी से डिजिटल इकॉनमी की वृद्धि पर असर पड़ेगा और 5जी नेटवर्क के साथ वाई-फाई आधारित कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा नहीं मिल पाएगा।
