इंदौर: समाज में हो रहे आर्थिक बदलावों के साथ-साथ दुनिया की बढ़ती आबादी के चलते खेती के ज़रूरी संसाधनों, जैसे ज़मीन और पानी, पर दबाव बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2050 तक दुनिया की आबादी को 70% ज़्यादा प्रोटीन की ज़रूरत होगी, और विज्ञान कहता है कि सोयाबीन प्रोटीन का एक आदर्श स्रोत है। एक स्वस्थ समाज के लिए प्रोटीन एक आवश्यक तत्व है, लेकिन यदि यह ज़रूरत केवल जानवरों से मिलने वाले प्रोटीन से पूरी की गई, तो पर्यावरण को नुकसान होगा, ज़्यादा ग्रीनहाउस गैसें निकलेंगी और अधिक पानी व ज़मीन की आवश्यकता होगी। इसलिए, हमें प्रोटीन के मौजूदा स्रोतों को बेहतर बनाने और इंसानों के लिए नए, अच्छे और किफायती प्रोटीन विकल्प खोजने की ज़रूरत है, और यहाँ पर सोया एक आदर्श विकल्प बनकर सामने आया है। भारत में किए गए एक सर्वे के अनुसार, 85% भारतीयों में प्रोटीन की कमी है। यहाँ तक कि 80% मांसाहारी लोगों में भी प्रोटीन की कमी पाई गई है। प्रोटीन की कमी से शरीर के विकास और सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए, खाने में अच्छी गुणवत्ता वाले और किफायती प्रोटीन स्रोतों को शामिल करना आवश्यक है।
सोया फूड प्रमोशन एंड वेलफेयर एसोसिएशन (SFPWA) एक इंटरनेशनल सोया कांफ्रेंस कर रहा है, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में सोया खाने की नई जानकारियाँ बाँटना और पोषण में सोया की भूमिका पर चर्चा करना है। इस कॉन्फ्रेंस में सोया खाने की नई और उभरती प्रवृत्तियाँ, सोया खाना बनाने में नई तकनीकी प्रगति, सोया के पोषण और सेहत के फायदे और सोया से जुड़े नए बिजनेस के मौकों पर विचार किया जाएगा।
भारत की बड़ी सोया उत्पादक कंपनियाँ, जैसे यूएस सोयाबीन एक्सपोर्ट काउंसिल, सोनिक बायोकेम, विप्पी सोय पतंजलि फूड्स, मैरिको, सॉलिडारिडाड, सेवर, पीसीके, सीएसके फूडटेक, और बायोन्यूट्रिएंट्स इस कार्यक्रम में भाग ले रही हैं। इस कार्यक्रम में भारत और अमेरिका के वक्ता और प्रतिभागी शामिल होंगे।
SFPWA के चेयरमैन डॉ. सुरेश इतापू, यूएस सोयाबीन एक्सपोर्ट काउंसिल के रीजनल डायरेक्टर श्री केविन रोपके, SFPWA के मुख्य संरक्षक श्री गिरीश मतलानी, और पतंजलि फूड्स के सीईओ श्री संजीव अस्थाना इस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे। 25 से अधिक वक्ता सोयाबीन को ह्यूमन फूड के रूप में उपयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों और सोया खाद्य व्यवसायों की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

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