इंदौर – हार्ट वाल्व डिजीज के इलाज में काफी सुधार हुआ है, जिससे मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प उपलब्ध हुए हैं। जहां सर्जिकल ऑर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (एसएवीआर) एक पारंपरिक प्रक्रिया रही है, वहीं ट्रांसकैथेटर ऑर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (टीएवीआर) ने इस क्षेत्र में नया बदलाव लाया है। यह तकनीक कम आक्रामक (मिनिमली इनवेसिव) होने के कारण मरीजों की रिकवरी को बेहतर बनाती है, अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि को कम करती है और जीवनरक्षक इलाज को अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद करती है|
दशकों से, एसएवीआर (सर्जिकल एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट) गंभीर एओर्टिक वाल्व डिजीज के इलाज के लिए मुख्य उपचार रहा है। इस प्रक्रिया में ओपन-हार्ट सर्जरी की जाती है, जहां सर्जन छाती (स्टर्नोटॉमी) में एक चीरा लगाकर हृदय तक पहुंचते हैं, खराब वाल्व को हटाते हैं और उसकी जगह नया वाल्व लगाते हैं। एसएवीआर अपनी लंबी ड्यूरेबिलिटी के लिए जाना जाता है और आमतौर पर युवा और कम जोखिम वाले मरीजों के लिए प्राथमिक पसंद होता है, जिन्हें एक मजबूत और टिकाऊ समाधान की आवश्यकता होती है।
हालांकि, सभी मरीज ओपन-हार्ट सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते, खासकर वे जो बुजुर्ग, कमजोर या कई स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त होते हैं। ऐसे मरीजों के लिए टीएवीआर (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट) एक नई और प्रभावी तकनीक के रूप में उभरा है। इसमें बड़े चीरे की बजाय आमतौर पर जांघ में एक छोटा कट लगाकर कैथेटर (एक पतली, लचीली ट्यूब) की मदद से नया वाल्व लगाया जाता है। यह तरीका शरीर पर कम दबाव डालता है, अस्पताल में रुकने की अवधि घटाता है और मरीजों को पारंपरिक सर्जरी की तुलना में जल्दी सामान्य जीवन में लौटने में मदद करता है।
बॉम्बे हॉस्पिटल, इंदौर के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. इदरीस अहमद खान बताते हैं
एसएवीआर और टीएवीआर, दोनों ने हृदय वाल्व उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। एसएवीआर अब भी कई मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है, खासकर उन मरीजों के लिए जिन्हें लंबे समय तक टिकाऊ समाधान की जरूरत होती है। हालांकि, टीएवीआर ने उन मरीजों के लिए नई उम्मीद जगाई है, जिन्हें पहले सर्जरी के लिए अत्यधिक जोखिम वाला माना जाता था। लगातार हो रहे नवाचारों के साथ, अब हम हर मरीज के लिए व्यक्तिगत उपचार उपलब्ध करा सकते हैं, जिससे उन्हें सर्वोत्तम परिणाम मिल सकें।