वैश्विक उपभोक्ता वस्तु कंपनी Unilever ने अपने खाद्य (फूड) कारोबार से पीछे हटने का बड़ा फैसला लिया है, जो कंपनी के लंबे इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। दशकों तक खाद्य उत्पादों से अपनी पहचान बनाने वाली कंपनी अब अपने पोर्टफोलियो को पुनर्गठित करते हुए तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों—खासकर ब्यूटी, पर्सनल केयर और वेलनेस—पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
हाल ही में कंपनी ने अपने फूड बिजनेस को अमेरिकी मसाला और कंडिमेंट कंपनी McCormick & Company के साथ एक बड़े सौदे में शामिल करने की घोषणा की है। यह डील करीब 65 अरब डॉलर की मानी जा रही है और इसे वैश्विक खाद्य उद्योग के सबसे बड़े सौदों में से एक बताया जा रहा है।
इस कदम के साथ यूनिलीवर एक तरह से अपने पारंपरिक खाद्य कारोबार से दूरी बना रहा है। कंपनी के पोर्टफोलियो में कभी नॉर, हेलमैन्स और अन्य लोकप्रिय फूड ब्रांड्स का बड़ा योगदान रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में इन उत्पादों की ग्रोथ धीमी रही है। इसके विपरीत, ब्यूटी और पर्सनल केयर सेगमेंट ने तेज़ वृद्धि दिखाई है, जिसने कंपनी को अपनी रणनीति बदलने के लिए प्रेरित किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल लागत या मुनाफे का मामला नहीं है, बल्कि बदलते उपभोक्ता रुझानों का भी असर है। विकसित देशों में पैकेज्ड फूड की मांग स्थिर हो रही है, जबकि हेल्थ, वेलनेस और पर्सनल केयर उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यूनिलीवर अपने संसाधनों को उन क्षेत्रों में लगाना चाहता है जहां भविष्य में ज्यादा ग्रोथ की संभावना है।
हालांकि, इस फैसले को लेकर निवेशकों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। कुछ निवेशकों ने इसे कंपनी के लिए सकारात्मक कदम बताया है, क्योंकि इससे बिजनेस ज्यादा फोकस्ड और लाभकारी हो सकता है। वहीं, कुछ ने चिंता जताई है कि इतने बड़े बदलाव से अल्पकालिक अस्थिरता आ सकती है और कंपनी को नई संरचना में ढलने में समय लग सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि यूनिलीवर का यह बदलाव अचानक नहीं आया है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने धीरे-धीरे अपने फूड पोर्टफोलियो को कम किया है—पहले स्प्रेड्स बिजनेस की बिक्री, फिर चाय कारोबार का अलग होना और हाल ही में आइसक्रीम डिवीजन को अलग करना इसी रणनीति का हिस्सा रहे हैं।
भारत जैसे बाजारों के लिए यह कदम थोड़ा अलग हो सकता है, क्योंकि कंपनी ने अपने भारतीय फूड ऑपरेशन्स को इस सौदे से बाहर रखा है। इससे यह संकेत मिलता है कि उभरते बाजारों में खाद्य कारोबार अभी भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।
कुल मिलाकर, यूनिलीवर का फूड बिजनेस से पीछे हटना वैश्विक कॉर्पोरेट रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। यह दिखाता है कि बड़ी कंपनियां अब व्यापक पोर्टफोलियो के बजाय फोकस्ड और उच्च-विकास वाले क्षेत्रों पर ध्यान दे रही हैं, जिससे आने वाले समय में पूरे उद्योग की दिशा बदल सकती है।