ज़ूम कम्युनिकेशंस, इंक. (NASDAQ: ZM) ने आज डिजिटल एम्पावरमेंट फ़ाउंडेशन (डीईएफ) के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने की घोषणा की है। इस कदम के ज़रिए ज़ूम ने भारत में डिजिटल समावेशन, आर्थिक अवसरों और लोगों के बीच बेहतर जुड़ाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह पहल कर्नाटक के दूरदराज़ और वंचित ज़िलों में लोगों को डिजिटल कौशल और जरूरी डिजिटल टूल्स तक बेहतर पहुँच दिलाने में मदद करेगी।
तेलंगाना और मध्य प्रदेश में पहले की गई साझेदारियों को आगे बढ़ाते हुए, यह नई साझेदारी कर्नाटक में 55 डिजिटल एक्सेस सेंटर्स की स्थापना में सहयोग देगी। इन केंद्रों को समुदाय द्वारा संचालित केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ डिजिटल कनेक्टिविटी, कौशल प्रशिक्षण और समावेशी आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से 16,500 से बहुत छोटे स्तर के उद्यमियों और कारीगरों को प्रशिक्षण देने और 1,10,000 से अधिक नागरिकों तक पहुँचने की उम्मीद है, ताकि वे डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
ज़ूम की मुख्य परिचालन अधिकारी अपर्णा बावा ने कहा “तकनीक तक पहुँच आज के बढ़ते डिजिटल और एआई-प्रेरित विश्व में समावेशी विकास की बुनियाद है, लेकिन यही पहुँच तब अवसर बनती है जब उसमें मानवीय जुड़ाव शामिल हो| डीईएफ के साथ अपनी निरंतर साझेदारी के माध्यम से हम भारत भर के समुदायों को आवश्यक कौशल, आत्मविश्वास और सहयोग प्रदान करने में मदद कर रहे हैं, ताकि वे जहाँ भी हों, डिजिटल अर्थव्यवस्था में सार्थक रूप से भाग ले सकें और आगे बढ़ सकें।”
प्रतिभागी डिजिटल टूल्स का उपयोग करेंगे, जिनमें ज़ूम का एआई-फर्स्ट ओपन वर्क प्लेटफ़ॉर्म भी शामिल है। इसके माध्यम से वे बाज़ारों से जुड़ सकेंगे, सेवाओं तक पहुँच बना सकेंगे, डिजिटल स्टोरफ़्रंट तैयार कर सकेंगे, वर्चुअल रूप से सहयोग कर सकेंगे और अपने उद्यमों को ऑनलाइन बढ़ा सकेंगे।
कर्नाटक पहल का एक मुख्य उद्देश्य भौगोलिक संकेत के टैग वाले उद्योगों से जुड़े कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमियों को सशक्त बनाना है। डिजिटल मार्केटिंग, स्टोरीटेलिंग और वर्चुअल बिज़नेस सहयोग में व्यावहारिक प्रशिक्षण के जरिए ये केंद्र प्रतिभागियों को ऑनलाइन टूल्स का उपयोग करना सिखाएँगे, ताकि वे अपने क्षेत्र की पारंपरिक कलाओं और उत्पादों को व्यापक बाज़ार तक पहुँचा सकें। इससे सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।
साल 2002 में स्थापित डीईएफ भारत में डिजिटल अंतर को कम करने के लिए काम करता है। यह एक समुदाय-आधारित, स्थानीय मॉडल पर काम करता है, जिसका नेतृत्व महिला सामाजिक उद्यमी करती हैं, जिन्हें सूचना प्रेन्योर कहा जाता है। डिजिटल कौशल और बुनियादी ढांचे से सुसज्जित ये सूचना प्रेन्योर गाँव स्तर पर लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार, वित्तीय सेवाओं और आजीविका के अवसरों तक पहुँच दिलाने में मदद करती हैं। 10,000 से अधिक गाँवों तक पहुँच बनाने और 3.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को सेवाएँ देने वाले अपने नेटवर्क के साथ, डीईएफ दूरदराज़ समुदायों को जोड़ने और पूरे भारत में डिजिटल साक्षरता व आजीविका को बढ़ावा देने में लगातार अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
डिजिटल एम्पावरमेंट फ़ाउंडेशन के संस्थापक और निदेशक ओसामा मंज़र ने कहा “ज़ूम के साथ हमारी निरंतर साझेदारी ज़मीनी स्तर से भारत की डिजिटल खाई को कम करने में मदद कर रही है और सबसे वंचित समुदायों के बीच डिजिटल लाभ का निर्माण कर रही है| तकनीक तेज़ी से बदल रही है, और हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई भी पीछे न छूटे। डीईएफ की जमीनी पहुँच को ज़ूम की तकनीक और संसाधनों के साथ जोड़कर हम समुदायों को जुड़ने और टिकाऊ आजीविका बनाने के लिए सशक्त बना रहे हैं।”
यह पहल भारत में ज़ूम केयर्स के परोपकारी प्रयासों को आगे बढ़ाती है, जिनमें हेड हेल्ड हाई फ़ाउंडेशन, साइबरपीस फ़ाउंडेशन, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़, विमेन्स कलेक्टिव और गूंज के साथ सहयोग भी शामिल हैं। वर्ष 2025 के अंत में ज़ूम ने “एआई फॉर गुड” के लिए तीन वर्षों में 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि एआई के प्रति तैयारियों को बढ़ावा दिया जा सके और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाला जा सके।
ज़ूम और डीईएफ मिलकर डिजिटल अवसरों के लिए समावेशी और समुदाय-आधारित रास्ते तैयार कर रहे हैं, जहाँ तकनीक तक पहुँच के साथ कौशल, सहयोग और मानवीय जुड़ाव भी सुनिश्चित किया जाता है। जैसे-जैसे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, यह साझेदारी हमारी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि विकास का लाभ सभी तक पहुँचे और अवसर उन लोगों तक भी जाएँ जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।