अब स्टार्टअप फाउंडर्स खुद कर सकेंगे H-1B वीज़ा स्पॉन्सर

 

एक ऐतिहासिक बदलाव के तहत अब अमेरिकी सरकार ने भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स को खुद के लिए H-1B वीज़ा स्पॉन्सर करने की अनुमति दे दी है। 2024 में अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) द्वारा जारी नई गाइडलाइंस और 2025 की शुरुआत में लागू इस नीति के अनुसार, अब वे स्टार्टअप फाउंडर्स जो किसी अमेरिकी कंपनी में कम से कम 50% हिस्सेदारी रखते हैं, खुद को एक ‘कर्मचारी’ के रूप में स्पॉन्सर कर सकते हैं — बशर्ते वे एक वैध एम्प्लॉयर-एम्प्लॉयी संबंध स्थापित करें। DHS का कहना है कि इससे अमेरिका में रोजगार, नए उद्योग और अवसर पैदा हो सकते हैं।

इस वीज़ा के लिए पात्रता पाने के लिए फाउंडर को सबसे पहले अमेरिका में एक वैध कंपनी बनानी होगी और एक स्पेशियलिटी ऑक्यूपेशन वाली भूमिका में होना चाहिए, जो न्यूनतम स्नातक डिग्री की मांग करती है। उन्हें यह भी साबित करना होगा कि कंपनी में एक स्वतंत्र निगरानी इकाई है (जैसे बोर्ड या निवेशक), जो उन्हें नियुक्त, सुपरवाइज़ या बर्खास्त कर सकती है। H-1B वीज़ा लॉटरी में भाग लेना आवश्यक है (जब तक वे कैप-एग्जेम्प्ट न हों), और फाउंडर को अमेरिकी वेतन मानकों के अनुसार वेतन मिलना चाहिए। इसके लिए USCIS में फॉर्म I-129 दाखिल करना होता है। वीज़ा शुरुआत में 3 साल के लिए मिलता है, जिसे 6 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद भी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया के ज़रिए, AC21 एक्ट के तहत, आगे एक्सटेंशन मिल सकता है।