Google ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक को और बेहतर बनाने के अपने प्रयासों के तहत Windsurf नामक स्टार्टअप की तकनीक का लाइसेंस लेने के लिए करीब $2.4 बिलियन की डील की है।

यह एक नॉन-एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग एग्रीमेंट है, जिसमें Windsurf की एआई आधारित कोडिंग तकनीक का उपयोग Google अपने प्रोजेक्ट्स में कर सकेगा। इस डील के तहत Windsurf के CEO वरुण मोहन, को-फाउंडर डगलस चेन और कुछ प्रमुख रिसर्च इंजीनियर अब Google DeepMind की टीम का हिस्सा बन गए हैं, जिससे Google के Gemini-पावर्ड कोडिंग टूल्स को नई दिशा मिलेगी।

यह सौदा ऐसे समय में हुआ है जब Windsurf का OpenAI के साथ संभावित अधिग्रहण लगभग $3 बिलियन में तय हो रहा था, लेकिन Microsoft द्वारा आईपी अधिकारों को लेकर आपत्ति जताने के कारण वह डील रद्द हो गई थी। इसके तुरंत बाद Google ने यह रणनीतिक कदम उठाया और न केवल तकनीक को लाइसेंस किया, बल्कि Windsurf की कोर टीम को भी शामिल कर लिया।

इस प्रकार की डील को टेक इंडस्ट्री में “acquihire” के रूप में जाना जाता है, जिसमें कंपनियाँ पूर्ण अधिग्रहण किए बिना तकनीक और प्रतिभा दोनों प्राप्त करती हैं, जिससे नियामकीय जटिलताओं से बचा जा सके। Microsoft, Amazon और Meta जैसे दिग्गज भी इस रणनीति को अपनाते रहे हैं।

Windsurf एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में काम करना जारी रखेगी, जिसमें लगभग 250 कर्मचारी अब भी कार्यरत हैं। वहीं, कंपनी ने Jeff Wang को अंतरिम CEO और Graham Moreno को नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। डील से Windsurf के निवेशकों को पूंजी की तरलता मिली है, जबकि Google को एक अनुभवी AI टीम और सिद्ध तकनीक तक तत्काल पहुंच प्राप्त हुई है, जिससे वह AI कोडिंग टूल्स की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सके।