भारत और अज़रबैजान के बीच पिछले एक वर्ष से जारी तनाव के बाद अब दोनों देशों ने संबंधों को नई दिशा देने की पहल की है। हाल ही में बाकू में आयोजित विदेश कार्यालय परामर्श के छठे दौर में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई, जिसने द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार के संकेत दिए हैं।
इस बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) और अज़रबैजान के उप विदेश मंत्री ने हिस्सा लिया। यह वार्ता वर्ष 2022 के बाद पहली औपचारिक बातचीत थी, ऐसे समय में जब दोनों देशों के संबंध कई मुद्दों को लेकर प्रभावित हुए थे। विशेष रूप से, अज़रबैजान और पाकिस्तान के करीबी संबंध तथा भारत और आर्मेनिया के बीच बढ़ते सहयोग ने इस तनाव को और गहरा किया था।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की। बातचीत में व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, फार्मास्युटिकल, ऊर्जा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही सीमा पार आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया, जो इस संवाद का एक अहम पहलू रहा।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के संबंधों का एक मजबूत आधार बना हुआ है। अज़रबैजान ने हाल ही में भारत को कच्चे तेल का निर्यात फिर से शुरू किया है, जो द्विपक्षीय व्यापार का प्रमुख हिस्सा है। इसके अलावा, भारतीय कंपनियां वहां के तेल और गैस क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बनाए हुए हैं, जिससे आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल रही है।
पिछले वर्ष हुए घटनाक्रमों ने दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़ा दिए थे। विशेष रूप से एक सैन्य कार्रवाई के बाद अज़रबैजान की प्रतिक्रिया से भारत ने असंतोष जताया था। वहीं, अज़रबैजान और पाकिस्तान के रणनीतिक संबंध तथा क्षेत्रीय विवादों में उनकी स्थिति ने भी तनाव को बढ़ाया। इन परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी स्पष्ट रूप से देखी गई थी।
हालांकि, हाल के महीनों में रिश्तों में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। राजनयिक स्तर पर संवाद बढ़ा है और दोनों पक्षों ने आपसी मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने की इच्छा जताई है। एक महत्वपूर्ण मानवीय कदम के रूप में अज़रबैजान ने संकट के समय भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में भी सहायता की, जिससे विश्वास बहाली में मदद मिली।इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने यह सहमति जताई कि वे खुले संवाद और सहयोग के जरिए अपने मतभेदों को दूर करेंगे। साथ ही, भविष्य में और अधिक संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। अगली बैठक भारत में आयोजित करने का निर्णय भी इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह वार्ता भारत और अज़रबैजान के संबंधों में एक नई शुरुआत का संकेत देती है। दोनों देश अब टकराव से आगे बढ़कर सहयोग और स्थिरता की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, जो न केवल उनके द्विपक्षीय हितों के लिए बल्कि क्षेत्रीय संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है।