भारत सरकार स्टील क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रही है। एक नीति दस्तावेज़ के अनुसार, देश अगले दशक में स्टील उद्योग से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को लगभग 25 प्रतिशत तक कम करने और साथ ही उत्पादन क्षमता को दोगुना से अधिक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। यह कदम भारत की औद्योगिक वृद्धि और जलवायु प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रस्तावित नीति के तहत भारत 2035-36 तक स्टील उत्पादन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को घटाकर प्रति टन तैयार स्टील पर लगभग 2 टन CO₂ तक लाना चाहता है। वर्तमान में भारतीय स्टील उद्योग का उत्सर्जन स्तर इससे काफी अधिक है, जो वैश्विक औसत से ऊपर माना जाता है।
साथ ही, भारत अपनी क्रूड स्टील उत्पादन क्षमता को 168 मिलियन टन से बढ़ाकर 400 मिलियन टन तक ले जाने की योजना बना रहा है। सरकार का मानना है कि देश में बढ़ते बुनियादी ढांचा विकास, निर्माण गतिविधियों और विनिर्माण विस्तार के कारण स्टील की मांग आने वाले वर्षों में तेज़ी से बढ़ेगी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े निवेश और नई तकनीकों की आवश्यकता होगी।
उत्सर्जन कम करने के लिए सरकार गैस-आधारित स्टील निर्माण को बढ़ावा देने, स्क्रैप स्टील के अधिक उपयोग, और हरित तकनीकों में निवेश जैसे उपायों पर जोर दे रही है। इसके अतिरिक्त, कोयले पर निर्भरता कम करने की रणनीति भी बनाई जा रही है, क्योंकि भारतीय स्टील उद्योग अभी बड़े पैमाने पर कोयला-आधारित उत्पादन तकनीकों पर निर्भर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण लेकिन आवश्यक है। एक ओर देश को अपनी औद्योगिक वृद्धि बनाए रखनी है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक जलवायु लक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप उत्पादन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना भी जरूरी है। खासकर यूरोपीय संघ जैसे बाजारों द्वारा कार्बन-आधारित सीमा शुल्क लागू किए जाने के बाद भारतीय स्टील उद्योग पर स्वच्छ उत्पादन की दिशा में बढ़ने का दबाव बढ़ गया है।
सरकार का अनुमान है कि इस विस्तार से लाखों नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं और भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारी पूंजी निवेश, तकनीकी नवाचार और ऊर्जा आपूर्ति ढांचे में सुधार आवश्यक होगा।
कुल मिलाकर, भारत की यह योजना दर्शाती है कि देश औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को साथ लेकर चलना चाहता है। यदि यह रणनीति सफल होती है, तो भारत वैश्विक स्टील उद्योग में अधिक प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ खिलाड़ी बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *