भारत का ऊर्जा परिवर्तन तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है और इस दिशा में लगातार नए मील के पत्थर स्थापित किए जा रहे हैं। उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकी में प्रगति को रेखांकित करने के एक दिन बाद, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र ने वित्त वर्ष मार्च 2026 में समाप्त होने पर अब तक की सबसे अधिक वार्षिक नई क्षमता वृद्धि—50.9 गीगावॉट (बड़े जलविद्युत को छोड़कर)—दर्ज की है। इस वृद्धि का नेतृत्व सौर ऊर्जा ने किया है, जिसकी स्थापित क्षमता अब 150 गीगावॉट के पार पहुंच चुकी है। केवल वित्त वर्ष 2026 में ही सौर क्षेत्र में 44.6 गीगावॉट की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई।

हाल के वर्षों की यह तेज़ रफ्तार एक निरंतर विस्तार को दर्शाती है। पिछले तीन वित्त वर्षों में भारत ने लगभग 98 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जो इस क्षेत्र में तीव्र विकास का संकेत है। यदि बड़े जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा को भी शामिल किया जाए, तो वित्त वर्ष 2026 में कुल क्षमता वृद्धि 55.3 गीगावॉट तक पहुंच गई।

मार्च 2026 तक भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (बड़े जलविद्युत को छोड़कर) बढ़कर 223 गीगावॉट हो गई है। इस वृद्धि का बड़ा हिस्सा महामारी के बाद के वर्षों में देखा गया है, जहां पिछले पांच वर्षों में लगभग 127 गीगावॉट क्षमता जोड़ी गई। इसमें सौर ऊर्जा का योगदान सबसे अधिक रहा, जिसने अकेले 109 गीगावॉट की बढ़ोतरी दर्ज की। यह आंकड़े इस क्षेत्र में तेजी और व्यापक स्तर पर किए जा रहे विस्तार को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

रूफटॉप सोलर सेगमेंट में भी उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2026 में 8.7 गीगावॉट की वृद्धि के साथ इसकी कुल स्थापित क्षमता 25.7 गीगावॉट तक पहुंच गई है, जो मार्च 2022 में केवल 6.6 गीगावॉट थी। यह वृद्धि दर्शाती है कि घरेलू और छोटे स्तर पर भी सौर ऊर्जा को तेजी से अपनाया जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर भी भारत की प्रगति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, भारत अब नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष 2025 में भारत ने लगभग 38 गीगावॉट सौर क्षमता जोड़ी, जो वैश्विक स्तर पर जोड़ी गई कुल 511 गीगावॉट क्षमता में एक महत्वपूर्ण योगदान है।

ऊर्जा के अन्य स्रोत भी भारत के ऊर्जा मिश्रण को मजबूत बना रहे हैं। पवन ऊर्जा ने वित्त वर्ष 2026 में 6.05 गीगावॉट की अपनी अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जिससे इसकी कुल क्षमता 56 गीगावॉट हो गई। बड़े जलविद्युत क्षेत्र में 3.7 गीगावॉट और परमाणु ऊर्जा में 0.7 गीगावॉट की वृद्धि हुई। इन सभी को मिलाकर भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता 283 गीगावॉट तक पहुंच गई है।

ऊर्जा उत्पादन के स्तर पर भी स्वच्छ ऊर्जा का योगदान लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में कुल बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 29.2% रही, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा (बड़े जलविद्युत सहित) की हिस्सेदारी 26.2% तक पहुंच गई है। यह संकेत देता है कि भारत न केवल क्षमता निर्माण में, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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