अमेरिका में स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) पाने की चाह रखने वाले भारतीय निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी सामने आई है। United States के U.S. Department of State द्वारा जारी हालिया Visa Bulletin में संकेत दिया गया है कि EB-5 visa program के तहत भारत के लिए जल्द ही कट-ऑफ डेट लागू हो सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में भारतीय आवेदकों को ग्रीन कार्ड पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
EB-5 वीज़ा प्रोग्राम उन विदेशी निवेशकों के लिए बनाया गया है जो अमेरिका में निवेश करके रोजगार के अवसर पैदा करते हैं। इस प्रोग्राम के तहत निवेशक और उनके परिवार को ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का मौका मिलता है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय निवेशकों के बीच इस योजना की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है, जिसके चलते आवेदन की संख्या भी काफी बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आवेदन में इस तेजी से बढ़ोतरी के कारण अब वीज़ा की उपलब्धता पर दबाव बढ़ रहा है। यदि मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो भारत के लिए भी चीन और वियतनाम की तरह बैकलॉग की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में कट-ऑफ डेट लागू होने का मतलब होगा कि केवल एक निश्चित तारीख तक आवेदन करने वाले लोगों को ही प्राथमिकता मिलेगी, जबकि बाकी लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
इस पूरे परिदृश्य में 30 सितंबर 2026 की तारीख बेहद अहम मानी जा रही है। यह अमेरिकी वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन होता है और इसी दिन तक वीज़ा आवंटन की गणना की जाती है। यदि इस समय तक भारतीय आवेदनों की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है, तो अगली अवधि के लिए कट-ऑफ लागू किया जा सकता है।
इस संभावित देरी का सीधा असर उन भारतीय परिवारों पर पड़ेगा जो अमेरिका में बसने की योजना बना रहे हैं। खासतौर पर वे निवेशक जिन्होंने हाल ही में आवेदन किया है या करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। लंबी प्रतीक्षा अवधि के कारण निवेश और इमिग्रेशन से जुड़ी रणनीतियों में बदलाव करना आवश्यक हो सकता है।
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग EB-5 वीज़ा के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें जल्द से जल्द प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए ताकि वे संभावित कट-ऑफ से पहले अपनी जगह सुनिश्चित कर सकें। साथ ही, उन्हें सभी दस्तावेज़ों और निवेश संबंधी आवश्यकताओं को सही तरीके से पूरा करना होगा, ताकि किसी प्रकार की देरी से बचा जा सके।
इसके अलावा, निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि EB-5 वीज़ा एक लंबी और जटिल प्रक्रिया हो सकती है, जिसमें कानूनी और वित्तीय दोनों पहलू शामिल होते हैं। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी है।
यह स्थिति यह भी दर्शाती है कि अमेरिका में इमिग्रेशन के नियम और प्रक्रियाएं लगातार बदल रही हैं, और आवेदकों को इन बदलावों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। सही समय पर सही निर्णय लेना ही इस प्रक्रिया में सफलता की कुंजी हो सकता है।