ईरान युद्ध का असर अब आम उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंच चुका है। भारत में लोकप्रिय शुगर-फ्री ड्रिंक Diet Coke की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कई शहरों में इसकी कमी देखने को मिल रही है। इस संकट के पीछे मुख्य वजह एल्यूमिनियम कैन की सप्लाई में आई बाधा बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बाधा के कारण खाड़ी क्षेत्र से आने वाली एल्यूमिनियम की सप्लाई प्रभावित हुई है। यह क्षेत्र वैश्विक एल्यूमिनियम उत्पादन का लगभग 9% हिस्सा प्रदान करता है, और शिपमेंट में देरी के कारण भारत में कैन की उपलब्धता कम हो गई है।
Diet Coke की खास बात यह है कि भारत में यह मुख्य रूप से केवल कैन में ही बेची जाती है। अन्य सॉफ्ट ड्रिंक्स जहां प्लास्टिक बोतल या ग्लास में उपलब्ध हैं, वहीं Diet Coke का पूरा निर्भर कैन पर है। यही कारण है कि कैन की कमी का सीधा असर इसकी सप्लाई पर पड़ा है।
कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर्स के अनुसार, उन्हें ऑर्डर देने के बावजूद पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही है। कुछ मामलों में कंपनी को सप्लाई को “ration” करना पड़ रहा है, यानी सीमित मात्रा में ही उत्पाद उपलब्ध कराया जा रहा है।
भारत के कई बड़े शहरों—जैसे मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली-NCR और पुणे—में रिटेल स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर Diet Coke की कमी साफ नजर आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि पहले जहां ऑर्डर कुछ घंटों में मिल जाते थे, अब डिलीवरी में काफी देरी हो रही है।
इस बीच, कंपनी वैकल्पिक उत्पादों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Coca-Cola अब Coke Zero जैसे विकल्प को प्रमोट कर रही है, जो प्लास्टिक बोतलों में उपलब्ध है और सप्लाई चेन पर कम निर्भर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या केवल एक ब्रांड तक सीमित नहीं है। ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन पर व्यापक असर पड़ा है, जिससे एल्यूमिनियम कैन और अन्य पैकेजिंग मटेरियल की कमी हो रही है। इसका असर बीयर और अन्य कैन-बेस्ड पेय पदार्थों पर भी पड़ सकता है।
इसके अलावा, भारत में शुगर-फ्री और हेल्थ-कॉन्शियस ड्रिंक्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि यह बाजार 2030 तक दोगुना होकर लगभग 4.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। ऐसे में सप्लाई में कमी और मांग में वृद्धि का यह संयोजन बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
सोशल मीडिया पर भी इस कमी को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने मजाकिया पोस्ट और शिकायतें साझा की हैं, जिससे यह मुद्दा ट्रेंड करने लगा है।
कुल मिलाकर, Diet Coke की यह कमी केवल एक पेय पदार्थ की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन और भू-राजनीतिक तनाव के असर का एक उदाहरण है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सप्लाई कब सामान्य होती है और कंपनियां इस संकट से कैसे निपटती हैं।

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