मध्य प्रदेश के खाद्य उत्पादों का निर्यात इन दिनों गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्ष और अस्थिर परिस्थितियों के कारण राज्य से भेजे जाने वाले उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर खासकर इंदौर सहित अन्य औद्योगिक शहरों के निर्यातकों पर पड़ा है, जो लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने उत्पाद भेजते रहे हैं।

राज्य से निर्यात होने वाले प्रमुख खाद्य उत्पादों में फ्रोजन पराठे, मसाले, रेडी-टू-ईट आइटम और अन्य प्रोसेस्ड फूड शामिल हैं। लेकिन हाल के घटनाक्रमों के चलते इन उत्पादों की डिलीवरी में भारी देरी हो रही है। पहले जहां माल को गंतव्य तक पहुंचने में लगभग 10 से 15 दिन लगते थे, अब वही समय बढ़कर 35 से 40 दिन तक पहुंच गया है।

इस देरी का मुख्य कारण समुद्री मार्गों में बदलाव और सुरक्षा कारणों से जहाजों का वैकल्पिक रास्तों से गुजरना है। इससे न केवल ट्रांजिट टाइम बढ़ा है, बल्कि परिवहन लागत और बीमा शुल्क भी काफी बढ़ गए हैं। बढ़ी हुई लागत का बोझ छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए संभालना मुश्किल हो रहा है, जिससे उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ रहा है।

कई निर्यातकों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और अनिश्चितता के कारण उन्हें नए ऑर्डर लेने में भी हिचकिचाहट हो रही है। कुछ मामलों में विदेशी खरीदारों ने देरी के चलते ऑर्डर रद्द कर दिए हैं या वैकल्पिक सप्लायर की तलाश शुरू कर दी है। इससे राज्य के निर्यात कारोबार को बड़ा झटका लगा है।

इसके अलावा, लंबे समय तक ट्रांजिट में रहने से फ्रोजन और प्रोसेस्ड फूड की गुणवत्ता बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। तापमान नियंत्रण और स्टोरेज की अतिरिक्त जरूरतों के कारण लागत और बढ़ जाती है, जिससे प्रतिस्पर्धा में बने रहना कठिन हो रहा है।

व्यापार से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो राज्य के खाद्य निर्यात क्षेत्र को स्थायी नुकसान हो सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वैकल्पिक निर्यात मार्ग, लॉजिस्टिक सहायता और वित्तीय राहत के उपाय किए जाएं, ताकि इस संकट से उबरने में मदद मिल सके।

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