ISRO की Small Satellite Launch Vehicle (SSLV) तकनीक का निर्माण अब HAL के हाथों, ₹511 करोड़ में जीती बोली

भारत की तेजी से बढ़ती अंतरिक्ष इंडस्ट्री को निजी कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने देश के छोटे सैटेलाइट लॉन्च रॉकेट (Small Satellite Launch Vehicle – SSLV) को निजी तौर पर बनाने की बोली जीत ली है। इस बात की जानकारी शुक्रवार को देश के अंतरिक्ष नियामक ने दी।

फरवरी में Reuters ने रिपोर्ट किया था कि SSLV तकनीक हासिल करने की दौड़ में तीन कंसोर्टियम फाइनलिस्ट थे — अल्फा डिज़ाइन टेक्नोलॉजीज (अडाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज की इकाई), भारत डायनामिक्स (सरकारी कंपनी) और HAL।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को एक बयान में बताया कि HAL ने अकेले ही इस प्रक्रिया में भाग लिया और जीत हासिल की।

IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र) के प्रमुख पवन गोयनका ने बताया कि HAL की विजयी बोली ₹511 करोड़ (करीब 59 मिलियन डॉलर) की रही। उन्होंने यह भी कहा कि SSLV तकनीक के ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने में लगभग दो साल का समय लगेगा।

HAL, जो भारत में फाइटर जेट निर्माण के लिए जानी जाती है, अब अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभाने जा रही है। यह सौदा भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के निजीकरण और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।