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जापान की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी Honda Motor Co. ने अपने इतिहास में पहली बार वार्षिक घाटा दर्ज किया है। कंपनी को वित्त वर्ष 2025-26 में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) कारोबार में भारी नुकसान और अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की नई टैरिफ नीतियों के कारण बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने लगभग 423.9 बिलियन येन (करीब 2.7 अरब डॉलर) का शुद्ध घाटा दर्ज किया, जो उसके लिए ऐतिहासिक रूप से पहली वार्षिक हानि है।
Honda के इस नुकसान की सबसे बड़ी वजह EV बिजनेस में लगभग 9 अरब डॉलर का भारी राइटडाउन बताया गया है। कंपनी ने स्वीकार किया कि वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग अपेक्षा से धीमी रही, खासकर अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में। इसके चलते Honda को अपनी EV रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ा है।
इसके अलावा अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की नीतियों के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी में कटौती और आयातित ऑटो पार्ट्स पर बढ़े टैरिफ ने Honda जैसे वैश्विक ऑटो निर्माताओं पर अतिरिक्त दबाव डाला। इससे उत्पादन लागत बढ़ी और EV प्रोजेक्ट्स की व्यवहारिकता प्रभावित हुई।
Honda ने इस नुकसान के बाद अपने कई बड़े EV प्रोजेक्ट्स रोक दिए हैं। कंपनी ने कनाडा में प्रस्तावित 11 अरब डॉलर की EV और बैटरी परियोजना को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। साथ ही उसने 2030 तक EV बिक्री के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को भी वापस ले लिया है।
हालांकि कंपनी के लिए एक सकारात्मक पहलू उसका मोटरसाइकिल कारोबार रहा। भारत और Brazil जैसे बाजारों में रिकॉर्ड बिक्री के चलते Honda के टू-व्हीलर बिजनेस ने कंपनी को कुछ राहत दी। Honda का कहना है कि उसकी मोटरसाइकिल डिवीजन ने इस कठिन समय में कंपनी की वित्तीय स्थिति को संभालने में अहम भूमिका निभाई।
अब Honda अपनी रणनीति बदलते हुए हाइब्रिड वाहनों (Hybrid Vehicles) पर ज्यादा फोकस कर रही है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह 2030 तक 15 नए हाइब्रिड मॉडल लॉन्च करेगी और पारंपरिक पेट्रोल व हाइब्रिड वाहनों के मिश्रण पर काम करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि Honda का यह कदम पूरे ऑटो सेक्टर के लिए संकेत है कि EV बाजार की रफ्तार उम्मीद से धीमी है और कंपनियां अब अधिक संतुलित रणनीति अपना रही हैं।