भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को वित्त वर्ष 2025-26 में झटका लगा है, जहां निर्यात में 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। Global Trade Research Initiative (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, देश का कुल टेक्सटाइल और परिधान निर्यात घटकर 35.8 बिलियन डॉलर पर आ गया है। यह गिरावट मुख्य रूप से कपास (cotton) और उससे जुड़े प्रमुख उत्पादों की कमजोर वैश्विक मांग के कारण देखी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और मांग में कमी के चलते भारतीय निर्यातकों को दबाव का सामना करना पड़ा। खासकर कॉटन यार्न, फैब्रिक्स और रेडीमेड गारमेंट्स जैसे प्रमुख सेगमेंट्स में निर्यात घटने से कुल प्रदर्शन प्रभावित हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और उपभोक्ता खर्च में कमी जैसे कारकों ने टेक्सटाइल डिमांड को कमजोर किया है। इसके अलावा, कुछ प्रतिस्पर्धी देशों द्वारा कम लागत पर उत्पाद उपलब्ध कराने से भारत की हिस्सेदारी पर असर पड़ा है।
भारत का टेक्सटाइल सेक्टर देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है और यह निर्यात आय का महत्वपूर्ण स्रोत भी है। ऐसे में इस गिरावट को उद्योग के लिए एक चेतावनी संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को मजबूत करने और लागत कम करने के उपायों पर जोर दिया है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि सिंथेटिक और मैन-मेड फाइबर से जुड़े उत्पादों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला, लेकिन यह कुल गिरावट को संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लाने और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन बाधाएं भी निर्यात में गिरावट के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। निर्यातकों का मानना है कि यदि इन चुनौतियों का समाधान किया जाए, तो आने वाले वर्षों में सेक्टर में सुधार संभव है।
सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाएं जैसे PLI (Production Linked Incentive) स्कीम और टेक्सटाइल पार्क परियोजनाएं भविष्य में इस सेक्टर को मजबूती देने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने के लिए तेजी से बदलाव अपनाने की आवश्यकता है।
आगे की राह को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मांग में सुधार, नए बाजारों की तलाश और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के जरिए भारत अपने टेक्सटाइल निर्यात को फिर से गति दे सकता है।