भारत का मत्स्य क्षेत्र बीते कुछ वर्षों में तेजी से विकसित होकर देश की खाद्य सुरक्षा, रोजगार और निर्यात आय का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2015 से अब तक इस क्षेत्र में लगभग 39,000 करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड निवेश किया गया है, जिसने इसके समग्र विकास को नई गति दी है।
यह क्षेत्र आज करीब 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों को प्रत्यक्ष रूप से आजीविका प्रदान करता है, जबकि इससे जुड़े मूल्य श्रृंखला में काम करने वाले लोगों की संख्या इससे लगभग दोगुनी है। इस व्यापक रोजगार सृजन ने ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।
उत्पादन के मामले में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। देश अब वैश्विक स्तर पर जलीय कृषि उत्पादन में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है और विश्व के कुल मछली उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। घरेलू मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले कुछ वर्षों में औसतन 7 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ा है।
निर्यात के क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पिछले एक दशक में समुद्री उत्पादों का निर्यात दोगुने से अधिक बढ़ा है। खासतौर पर झींगा निर्यात ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत अब 130 से अधिक देशों को 350 से ज्यादा प्रकार के समुद्री उत्पाद निर्यात कर रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में उसकी मजबूत उपस्थिति बनी है।
इसके साथ ही, निर्यात में मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है, जो यह दर्शाता है कि भारत केवल कच्चे उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रसंस्कृत और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों पर भी ध्यान दे रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा क्षमता और बढ़ी है।
सरकार इस क्षेत्र को और विविध बनाने के लिए उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे ट्यूना, सीबास, कोबिया, केकड़ा और समुद्री शैवाल के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ ही कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक मछली बंदरगाहों और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम में निवेश किया जा रहा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाया जा सके।
नियमों और प्रक्रियाओं को भी सरल और तेज बनाया गया है। आयात-निर्यात से जुड़ी स्वीकृतियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के कारण समय में काफी कमी आई है, जिससे कारोबार करने में आसानी हुई है। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मछली पकड़ने के उपकरणों में सुधार भी किया जा रहा है।
आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य है कि मूल्यवर्धित निर्यात को और बढ़ाया जाए, नए निर्यात केंद्र विकसित किए जाएं और वैश्विक बाजारों में भारत की हिस्सेदारी को और मजबूत किया जाए। कुल मिलाकर, मत्स्य क्षेत्र भारत की आर्थिक प्रगति में एक मजबूत और स्थायी योगदान देने