मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और वैश्विक सप्लाई चेन पर इसके प्रभाव के बीच Russia ने एक बड़ा प्रस्ताव रखते हुए BRICS देशों के साथ संयुक्त खाद्य भंडार (food reserves) बनाने की मांग की है। इस पहल का उद्देश्य संभावित वैश्विक खाद्य संकट से निपटना और आपूर्ति में आ रही बाधाओं को कम करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, रूस के सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारी अलेक्जेंडर मस्लेन्निकोव ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि BRICS सदस्य देशों और सहयोगी राष्ट्रों के बीच खाद्य भंडार तैयार किए जाने चाहिए, ताकि संकट की स्थिति में आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर खासतौर पर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पड़ा है, जो वैश्विक उर्वरक (fertilizer) व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के लगभग एक-तिहाई उर्वरक व्यापार इस मार्ग से होता था, लेकिन संघर्ष के कारण इसमें गंभीर बाधाएं आई हैं।
उर्वरक की कमी का सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो प्रमुख फसलों की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है और खाद्य महंगाई तेजी से बढ़ सकती है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर भूख से जूझ रहे लोगों की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है।
रूस, जो दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है, इस स्थिति को एक अवसर के रूप में भी देख रहा है। वह एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों को खाद्य निर्यात बढ़ाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही रूस BRICS देशों के साथ कृषि सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है, ताकि वैश्विक बाजार में स्थिरता लाई जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS देशों के पास पर्याप्त संसाधन और उत्पादन क्षमता है, जिससे वे वैश्विक खाद्य संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भारत, चीन और ब्राजील जैसे बड़े कृषि उत्पादक देशों के साथ मिलकर यह समूह एक मजबूत वैकल्पिक सप्लाई नेटवर्क तैयार कर सकता है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए सदस्य देशों के बीच नीतिगत समन्वय, लॉजिस्टिक्स और भंडारण क्षमता को मजबूत करना जरूरी होगा। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार और राजनीतिक परिस्थितियों का भी इस योजना पर प्रभाव पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, रूस का यह प्रस्ताव वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि BRICS देश इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो यह न केवल खाद्य संकट को कम करने में मदद करेगा, बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

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