देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारियों ने 25 और 26 मई 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस प्रस्तावित हड़ताल को लेकर बैंकिंग सेक्टर में हलचल तेज हो गई है और इसका असर देशभर की बैंकिंग सेवाओं पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, यह हड़ताल मुख्य रूप से वर्कमेन कैटेगरी के कर्मचारियों द्वारा की जाएगी, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा, बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कई महत्वपूर्ण मांगें लंबे समय से लंबित हैं, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस हड़ताल की सबसे प्रमुख मांगों में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े कर्मचारियों को पेंशन फंड मैनेजर चुनने का विकल्प देना शामिल है। इसके साथ ही बैंक के भीतर समानता (parity) से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रूप से उठाए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अन्य बैंकों की तुलना में कुछ मामलों में असमानता बनी हुई है, जिसे दूर करना जरूरी है।
कर्मचारी संगठनों ने कुल 16 मांगें रखी हैं, जिनमें पर्याप्त स्टाफ की भर्ती, स्थायी नौकरियों में आउटसोर्सिंग पर रोक, इंटर-सर्कल ट्रांसफर की सुविधा, करियर प्रोग्रेशन स्कीम की समीक्षा और सुरक्षा से जुड़े पदों पर भर्ती जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा, रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन लाभों में सुधार और मेडिकल सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग भी की गई है।
इस हड़ताल का आह्वान ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन द्वारा किया गया है, जिसने बैंक प्रबंधन को पहले ही नोटिस भेजकर अपनी मांगों से अवगत कराया है। संगठन का कहना है कि यदि इन मांगों पर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आगे भी आंदोलन तेज किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह हड़ताल तय समय पर होती है, तो बैंकिंग सेवाओं जैसे नकद निकासी, चेक क्लियरेंस, और शाखाओं में होने वाले अन्य कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं चालू रहने की संभावना है, लेकिन शाखा स्तर पर कामकाज में बाधा आ सकती है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश में बैंकिंग क्षेत्र तेजी से डिजिटल बदलाव और विस्तार के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी माना जा रहा है, ताकि ग्राहकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और बैंकिंग व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।