भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बृहस्पतिवार को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेशकों का दायरा बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड और खुदरा निवेशकों को इस सेक्टर में लाने से इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटीज में तरलता (Liquidity) बेहतर होगी। पांडे ने कहा कि फिलहाल निवेशक आधार सीमित है और इसमें संस्थागत निवेशकों का दबदबा है, जबकि खुदरा और विदेशी निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। सेकेंडरी मार्केट में कम ट्रेडिंग होने से तरलता घटती है और इससे निवेशकों की भागीदारी और कम हो जाती है।

दिल्ली में आयोजित NaBFID एनुअल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में बोलते हुए पांडे ने सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, ऊर्जा, पेट्रोलियम, गैस और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में एसेट मोनेटाइजेशन को तेज करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अधिकांश राज्य सरकारों ने अभी तक एसेट मोनेटाइजेशन की ठोस योजनाएं तैयार नहीं की हैं, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में गति नहीं आ पाई है। इसके लिए InvITs, REITs, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और सिक्योरिटाइजेशन जैसे विभिन्न विकल्प मौजूद हैं, जिनका अधिक उपयोग होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हालांकि म्युनिसिपल बॉन्ड्स, REITs और InvITs के माध्यम से जुटाए गए फंड पहले की तुलना में बढ़े हैं, लेकिन यह अभी भी देश के विकास के लिए आवश्यक “खरबों रुपये” की तुलना में बहुत कम हैं। पांडे ने बैंकों और सरकारी बजट पर अत्यधिक निर्भरता को जोखिमपूर्ण बताते हुए कहा कि कॉर्पोरेट बॉन्ड्स, InvITs, REITs और म्युनिसिपल बॉन्ड्स जैसे मार्केट-बेस्ड इंस्ट्रूमेंट्स से जोखिम को कई प्रतिभागियों में बांटा जा सकता है।

वर्तमान में सेबी के पास पांच REITs और 23 InvITs रजिस्टर्ड हैं, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में 1.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं और वित्त वर्ष 2025 के अंत तक इनका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 8.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर-फोकस्ड कैटेगरी-1 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स ने जून 2025 तक 7,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। पांडे ने यह भी बताया कि सेबी ने हाल ही में व्यापार सुगमता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें REITs को ‘इक्विटी’ के रूप में वर्गीकृत करना और REITs व InvITs के लिए ‘स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर’ की परिभाषा का विस्तार शामिल है।