भारत की बड़ी विद्युत उत्पादक कंपनियों में से एक वेदांता पावर लिमिटेड (व्हीपीएल) ने अपनी विकास यात्रा में नया इतिहास रचते हुए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर अपने शेयरों की लिस्टिंग की है। एक स्वतंत्र सूचीबद्ध कंपनी के रूप में शुरुआत करते हुए इसके शेयरों की ट्रेडिंग बीएसई पर स्क्रिप कोड :544781 और एनएसई पर स्क्रिप कोड – VEDPOWER के नाम से शुरू हो गई है। वेदांता पावर तलवंडी साबो थर्मल प्लांट, पंजाब 1,980 मेगावाट का सुपर-क्रिटिकल कोयला-आधारित थर्मल पावर प्लांट है। यह अपनी उत्पादित बिजली का 100% पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को आपूर्ति करता है और भरोसेमंद, बड़े पैमाने पर विद्युत उत्पादन के माध्यम से पंजाब की ऊर्जा आवश्यकताओं का 35% पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
15 जून,2026 को आयोजित शानदार लिस्टिंग समारोह की अगुवाई वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने की। इसके साथ ही भारतीय शेयर बाजारों में वेदांता पावर लिमिटेड की आधिकारिक शुरुआत हो गई है जो कंपनी के विकास, मूल्य निर्माण और देश की प्रगति में एक नया अध्याय जोड़ेगा। इस मौके पर उनके साथ प्रिया अग्रवाल हेब्बर, चेयरपर्सन, एचजेडएल (HZL) और गैर-कार्यकारी निदेशक, वेदांता लिमिटेड, वेदांता समूह के अध्यक्ष आकर्ष हेब्बर और वेदांता लिमिटेड के वाइस चेयरमैन नवीन अग्रवाल मौजूद थे। समारोह में वेदांता पावर लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजिंदर सिंह आहूजा, मुख्य वित्तीय अधिकारी पंकज झा और वेदांता समूह के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
वेदांता पावर के लिए यह लिस्टिंग एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एक पूरी तरह समर्पित, और स्वतंत्र व्यवसाय के रूप में कंपनी की नींव बेहद मजबूत है जो भारत में बिजली की तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। देश के औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना, आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों और आर्थिक प्रगति के लिए बिजली मुख्य जरूरत है। ऐसे में भरोसेमंद बिजली आपूर्ति के जरिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में कंपनी बड़ी भूमिका निभाने के लिए कटिबद्ध है।
वेदांता पावर के साथ ही ग्रुप से अलग होकर सूचीबद्ध हुई बाकी कंपनियों – एल्यूमिनियम, ऑयल एंड गैस और आयरन एंड स्टील ने भी शेयर बाजार में ट्रेडिंग शुरू कर दी है।
इस अवसर पर वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा,‘‘24 साल पहले वेदांता लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी थी और आगे चलकर उसने एफटीएसई 100 कंपनियों में अपनी जगह बनाई। उस दिन हमने जो बीज बोया था वह आज एक विशाल बरगद का पेड़ बन चुका है। अब उसकी छांव में पले बढ़े पौधे प्रमुख सेक्टरों में बड़े दिग्गज बनने और भारत के तेज विकास में बड़ा योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भविष्य की अर्थव्यवस्था, जिसमें एआई, विकसित उत्पादन और ऊर्जा संक्रमण सबसे आगे होंगे, उनमें ऊर्जा, खनिजों और धातुओं की बहुत ज्यादा जरूरत होगी। आज भारत अपनी इन जरूरतों का 50 फीसदी हिस्सा आयात करता है। भविष्य में हमें इसमें पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना होगा।’’
स्वतंत्र रूप से सूचीबद्ध वेदांता समूह की ये कंपनियां इन बेहद जरूरी कच्चे माल की भारी मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने में बड़ी भूमिका निभाएंगी। ये कंपनियां पीढ़ियों तक देश की सेवा करने, शेयरधारकों के लिए लंबी अवधि के मूल्य निर्माण, भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए बनाई गई हैं। वेदांता के विकास का अगला अध्याय हम अकेले नहीं लिख सकते। इसके लिए हमारे शेयरधारकों के भरोसे, सरकार के सहयोग और 150 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और साझेदारी की जरूरत होगी। दुनिया में भारत जैसी कोई दूसरी जगह नहीं है और ये वक्त भारत का है।’’
भारत की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूत और भरोसेमंद ऊर्जा अधोसरंचना हमेशा बेहद जरूरी होगा। वर्तमान में पंजाब, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 4.78 गीगावॉट की कुल क्षमता (4.18 गीगावॉट चालू और 0.6 गीगावॉट चालू होने की प्रक्रिया में) के साथ वेदांता पावर देश का पांचवां सबसे बड़ा निजी विद्युत उत्पादक है। यह व्यवसाय बेहद मजबूत बुनियादी प्रचालन पर टिका है जिसमें 74 फीसदी क्षमता लंबी और मध्यम अवधि के पावर परचेज एग्रीमेंट्स के जरिए सुरक्षित है और चालू क्षमता में 85 फीसदी घरेलू कोयले की सुरक्षा जुड़ी हुई है। यह व्यवस्था बड़े पैमाने पर भरोसेमंद बिजली देने और देश के विकास की प्राथमिकताओं को सहयोग देने के लिए मजबूत और स्थिर आधार प्रदान करती है।
दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती विशाल अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए वेदांता पावर को बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है ताकि लगातार और भरोसेमंद बिजली की आपूर्ति की जा सके। अगले दशक में भारत की बिजली उत्पादन क्षमता की जरूरत दोगुनी होने और वित्तीय वर्ष 2036 तक 1121 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में कंपनी देश के विकास के लक्ष्यों में अपना योगदान देने के बड़े अवसरों के प्रति सचेत है।
विकास के स्पष्ट रोडमैप के साथ वेदांता पावर अपने प्रचालनों को बेहतर बनाने, कुशलता से क्षमता बढ़ाने और भारत के लिए लंबी अवधि का पावर प्लेटफॉर्म तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी की योजना अपनी क्षमता को बढ़ाकर 20 गीगावॉट करने की है साथ ही उसका दीर्घकालिक लक्ष्य देश की शीर्ष तीन विद्युत उत्पादक कंपनियों में शामिल होना है। अपनी औद्योगिक यात्रा में वेदांता पावर को उम्मीद है कि वह वित्तीय वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में अपने सक्ती प्लांट की 600 मेगावॉट की दूसरी इकाई को चालू कर देगी और वित्तीय वर्ष 2033 तक अपनी कुल क्षमता को बढ़ाकर 12 गीगावॉट कर लेगी। इस विस्तार का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा अधोसंरचना और प्रचालन के फायदों का लाभ उठाकर ब्राउनफील्ड परियोजनाओं के जरिए पूरा किए जाने का लक्ष्य है।
वेदांता पावर का मानना है कि आने वाले दशकों में भारत की ऊर्जा जरूरतों में कोयले की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यह विकास यात्रा नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा के स्रोतों के साथ मिलकर आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही वेदांता पावर, जो वर्तमान में थर्मल पावर कंपनी है, अपनी लंबी अवधि की विस्तार योजना के तहत जलविद्युत,बैटरी स्टोरेज और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में भविष्य के विकास के अवसरों को देख रही है। कंपनी परमाणु ऊर्जा को स्वच्छ और चैबीस घंटे भरोसेमंद बिजली स्रोत के रूप में देखती है जो भारत के ऊर्जा संक्रमण को सफल बनाने में प्रमुख जरिया साबित हो सकती है।