अग्रिम और कॉर्पोरेट कर संग्रह में सुस्ती के चलते चालू वित्त वर्ष में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में गिरावट दर्ज
रविवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों से यह संकेत मिला है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 4.59 ट्रिलियन रुपये रहा है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 1.39 प्रतिशत कम है। इस गिरावट का प्रमुख कारण अग्रिम कर संग्रह की रफ्तार में आई सुस्ती को माना जा रहा है।
1 अप्रैल से लेकर 19 जून, 2025 के बीच अग्रिम कर संग्रह में केवल 3.87 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह आंकड़ा 1.56 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच पाया। जबकि 2024 की इसी अवधि में अग्रिम कर संग्रह में तेज गति से 27 प्रतिशत की सालाना वृद्धि देखी गई थी। यह अंतर इस बात की ओर संकेत करता है कि इस वर्ष कंपनियों और व्यक्तिगत करदाताओं द्वारा अग्रिम कर भुगतान की प्रवृत्ति धीमी रही है।
इसके अलावा, कॉर्पोरेट कर संग्रह में भी गिरावट दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान कॉर्पोरेट कर संग्रह घटकर लगभग 1.73 ट्रिलियन रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट को दर्शाता है। यह संकेत करता है कि कंपनियों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही है, या वे टैक्स की भुगतान रणनीतियों को पुनः समायोजित कर रही हैं।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों में अपेक्षित तेजी नहीं आ पाई है, जिससे प्रत्यक्ष कर संग्रह प्रभावित हुआ है। यह रुझान आगामी महीनों में सरकार के राजस्व लक्ष्यों और बजट प्रबंधन के लिए एक चुनौती बन सकता है।
