भारतीय नागरिकों और संस्थाओं की जमा राशि बढ़कर ₹37,600 करोड़ हो गई है, जो 2023 की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा है। इस तेजी से बढ़ोतरी ने एक बार फिर “काला धन” (ब्लैक मनी) को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि स्विस बैंक में पैसा होना हमेशा गैरकानूनी नहीं होता, लेकिन – क्या यह पैसा वैध है या अवैध?

छले कुछ वर्षों में भारत और स्विट्ज़रलैंड के बीच Automatic Exchange of Information (AEOI) समझौते के तहत दोनों देश खाताधारकों की वार्षिक जानकारी साझा करते हैं। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और टैक्स चोरी रोकना है। हालांकि, इस आंकड़े में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे भारतीय कंपनियों और निवेशकों की विदेशों में बढ़ती गतिविधियाँ, करेंसी वैल्यू में बदलाव, और कुछ संस्थानों का वैध रूप से फंड ट्रांसफर करना।

फिर भी, इतना बड़ा आंकड़ा यह संकेत देता है कि देश के बाहर रखे धन पर निगरानी और जांच ज़रूरी है। यदि किसी खाते में संदेहास्पद लेन-देन पाया जाता है, तो आयकर विभाग या प्रवर्तन निदेशालय उसकी जांच कर सकते हैं। सरकार के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह पैसा टैक्स चुकाकर जमा किया गया है या नहीं।

स्विस बैंकों में जमा यह राशि पूरी तरह अवैध नहीं मानी जा सकती, लेकिन इसकी पारदर्शिता और वैधता की जांच अत्यंत आवश्यक है ताकि यह तय किया जा सके कि यह कानूनी निवेश है या काले धन का हिस्सा