भारत में साइबर सिक्योरिटी बाजार तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, देश का साइबर सुरक्षा बाजार वर्ष 2026 में 6.56 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2031 तक 15.06 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान बाजार 18 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ेगा, जो इसे देश के सबसे तेजी से बढ़ते सेक्टर्स में शामिल करता है।
डिजिटलीकरण की बढ़ती रफ्तार, साइबर हमलों का बढ़ता खतरा और कंपनियों द्वारा एडवांस्ड सिक्योरिटी सॉल्यूशंस में किया जा रहा निवेश इस तेजी के प्रमुख कारण हैं। बैंकिंग, फाइनेंस, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने साइबर सुरक्षा की जरूरत को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे कंपनियां क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकों को अपना रही हैं, वैसे-वैसे साइबर हमलों की जटिलता भी बढ़ती जा रही है। हैकर्स अब अधिक उन्नत और लक्षित हमले कर रहे हैं, जिससे डेटा सुरक्षा और नेटवर्क सुरक्षा को लेकर कंपनियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
भारत में छोटे और मध्यम उद्यम (SMEs) भी अब साइबर हमलों के दायरे में आ रहे हैं, जिसके चलते वे भी साइबर सुरक्षा में निवेश बढ़ा रहे हैं। पहले जहां केवल बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश करती थीं, अब स्टार्टअप और मध्यम स्तर की कंपनियां भी साइबर डिफेंस सिस्टम को प्राथमिकता दे रही हैं।
सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया अभियान और डेटा संरक्षण से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने से भी साइबर सुरक्षा बाजार को मजबूती मिल रही है। इसके साथ ही, कंपनियां अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित बनाने के लिए एंडपॉइंट सिक्योरिटी, नेटवर्क सिक्योरिटी और क्लाउड सिक्योरिटी सॉल्यूशंस को तेजी से अपना रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मैनेज्ड सिक्योरिटी सर्विसेज, थ्रेट इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC) जैसी सेवाओं की मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है। इससे साइबर सुरक्षा कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
हालांकि, इस तेजी से बढ़ते बाजार के सामने कुशल साइबर सिक्योरिटी पेशेवरों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्किल डेवलपमेंट और ट्रेनिंग पर ध्यान दिया जाए, तो भारत इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
आने वाले वर्षों में बढ़ते साइबर खतरों और डिजिटल इकोसिस्टम के विस्तार के चलते भारत का साइबर सिक्योरिटी बाजार और अधिक गति पकड़ने की उम्मीद है, जिससे यह सेक्टर देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक अहम स्तंभ बन सकता है।