सरकार द्वारा सोना और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद देश के सर्राफा बाजार और ज्वेलरी उद्योग में चिंता का माहौल गहरा गया है। नई व्यवस्था के तहत गोल्ड और सिल्वर पर प्रभावी आयात शुल्क अब 18.4% तक पहुंच गया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सीधा असर घरेलू बाजार, रोजगार और वैध व्यापार पर पड़ सकता है। अभी तक सरकार की ओर से इस ड्यूटी वृद्धि को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन बाजार में इसके प्रभाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

ज्वेलरी कारोबार से जुड़े संगठनों और व्यापारियों का कहना है कि आयात शुल्क में अचानक बढ़ोतरी से सोने और चांदी की कीमतों में और तेजी आ सकती है। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल है, जहां शादी-विवाह और त्योहारों के दौरान सोने की मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में बढ़ी हुई कस्टम ड्यूटी आम ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे रिटेल ज्वेलरी बिक्री में गिरावट आने की संभावना है।

उद्योग से जुड़े कई जानकारों ने आशंका जताई है कि अधिक आयात शुल्क के कारण गोल्ड स्मगलिंग को बढ़ावा मिल सकता है। जब भी सोने पर टैक्स या ड्यूटी अधिक होती है, तब अवैध तरीके से सोना लाने की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। इससे सरकार को राजस्व नुकसान होने के साथ-साथ वैध कारोबार करने वाले व्यापारियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि कानूनी आयात महंगा होने पर तस्करी का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जिसका असर पूरे सर्राफा उद्योग पर दिखाई देगा।

रोजगार के मोर्चे पर भी इस फैसले को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। भारत का जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है। छोटे ज्वेलर्स, कारीगर और हस्तशिल्प आधारित इकाइयां पहले से ही वैश्विक आर्थिक दबाव और महंगे कच्चे माल की चुनौती का सामना कर रही हैं। ऐसे में आयात शुल्क बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ सकती है और छोटे कारोबारियों के लिए व्यापार चलाना मुश्किल हो सकता है।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत में बढ़ा हुआ आयात शुल्क निवेशकों के व्यवहार को भी प्रभावित कर सकता है। कई निवेशक अब डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और अन्य वैकल्पिक निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। वहीं पारंपरिक फिजिकल गोल्ड खरीदारी में कमी देखने को मिल सकती है।

देश के कई बड़े ज्वेलरी व्यापार संगठनों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आयात शुल्क में राहत नहीं दी गई तो इससे घरेलू ज्वेलरी उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है। आने वाले समय में बाजार की प्रतिक्रिया और सरकार की संभावित नीति स्पष्ट होने के बाद ही इस फैसले के वास्तविक प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकेगा।

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