– 34 कंपनियां MSME सेक्टर की
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर तक 61 कंपनियों ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के जरिये 52,759 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इनमें से 34 छोटी और मध्यम आकार की कंपनियां (MSME) थीं। सोमवार को लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़ी कंपनियां बड़ी संख्या में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो रही हैं। उन्होंने कहा, ‘कंपनियां लगातार आइपीओ ला रही हैं। चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर तक इसके जरिये जुटाई गई राशि पिछले पूरे साल से बहुत ज्यादा है।’
सेबी के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में 56 कंपनियों ने आइपीओ के जरिये 31,050 करोड़ रुपये जुटाए थे। इनमें 27 कंपनियां एसएमई सेक्टर से जुड़ी थीं। इस साल अक्टूबर तक जिन 61 कंपनियों के आइपीओ आए, उनमें से 35 कंपनियों ने 100 करोड़ से कम और चार कंपनियों ने 100 से 500 करोड़ रुपये रकम जुटाई है। इन सभी में से 22 कंपनियां ऐसी रही हैं, जिन्होंने 500 करोड़ या उससे ज्यादा रकम जुटाई है। ऐसी 61 कंपनियों में से 10 स्वास्थ्य क्षेत्र और छह सीमेंट और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र से जुड़ी थीं।
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या Paytm के आइपीओ से निवेशकों को परेशानी हुई तो उन्होंने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि वन97 कम्यूनिकेशंस (पेटीएम की पैरेंट कंपनी) के आइपीओ से निवेशक परेशान हुए, लेकिन सच में ऐसा नहीं है।वित्त मंत्रालय की तरफ से सोमवार को लोकसभा में बताया गया कि सरकारी बैंकों ने एमएसएमई सेक्टर के कोरोना संकट से जूझ रहे 9.8 लाख अकाउंट की रिस्ट्रक्चरिंग की है। इन अकाउंट के माध्यम से 26 नवंबर तक 58,524 करोड़ रुपये के कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग हुई। वहीं, सरकारी बैंकों ने व्यक्तिगत कर्जदारों के 8.5 लाख अकाउंट रिस्ट्रक्चर किए हैं, जिनके लोन की कुल रकम 60,000 करोड़ रुपये से अधिक थी।
एक अलग प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्यमंत्री भागवत कराड ने लोकसभा में कहा कि सरकारी विभागों और अन्य संस्थाओं पर इस वर्ष 30 सितंबर तक एयर इंडिया का 244 करोड़ रुपये से अधिक बकाया था। नवंबर के आखिरी दिनों तक इसमें से 30.38 करोड़ रुपये वसूल किए गए थे।
