अवैध रेत खनन के बढ़ते मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए Supreme Court of India ने मध्य प्रदेश सरकार को सख्त चेतावनी दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यदि राज्य सरकार ने जल्द ही दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई और अभियोजन शुरू नहीं किया, तो वह चंबल क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती का आदेश दे सकती है।
यह मामला National Chambal Gharial Sanctuary में हो रहे अवैध खनन से जुड़ा है, जो एक संरक्षित और पर्यावरणीय रूप से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। यह अभयारण्य घड़ियाल, डॉल्फिन और कई दुर्लभ प्रजातियों का प्रमुख आवास है। लगातार हो रही अवैध खनन गतिविधियों ने यहां के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर खतरे में डाल दिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया। न्यायालय ने कहा कि केवल औपचारिक कदम उठाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी और कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि खनन और परिवहन पर निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए।
इस संदर्भ में अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि खनन क्षेत्रों और परिवहन मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। साथ ही, रेत ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य की जाए, ताकि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और अवैध परिवहन को रोका जा सके।
न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो केंद्र सरकार की सहायता से अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा सकती है। यह कदम कानून व्यवस्था को मजबूत करने और अवैध गतिविधियों पर तत्काल नियंत्रण पाने के लिए उठाया जा सकता है।
मामले की अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की गई है। तब तक राज्य सरकार से अपेक्षा की गई है कि वह ठोस कार्रवाई कर अदालत को प्रगति रिपोर्ट सौंपे। अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि पर्यावरण संरक्षण और कानून के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशा में सख्त कदम उठाए जाते हैं, तो न केवल अवैध खनन पर रोक लगेगी, बल्कि चंबल क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सकेगा।