पश्चिम बंगाल में स्कूल शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गान को अनिवार्य करने का निर्देश जारी किया है। यह फैसला 2026 के बदलते राजनीतिक और शैक्षणिक माहौल के बीच लिया गया है, जिसे राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत अब स्कूलों में प्रतिदिन राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गाया जाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों में स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि प्रार्थना सभा में सभी छात्र और शिक्षक इसकी सहभागिता करें। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ स्कूलों को कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग रखने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। इसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह गीत आजादी की लड़ाई के दौरान देशभर में राष्ट्रीय चेतना जगाने का माध्यम बना। संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मान दिया था।

राज्य सरकार का कहना है कि स्कूलों में राष्ट्रीय गीत के नियमित गायन से विद्यार्थियों में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई पीढ़ी को भारत के स्वतंत्रता इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए ऐसे कदम प्रभावी साबित हो सकते हैं।

हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी शुरू हो गई है। कुछ संगठनों ने इसे राष्ट्रहित में आवश्यक कदम बताया है, जबकि कुछ समूहों ने अनिवार्यता को लेकर सवाल उठाए हैं। पिछले कुछ वर्षों में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रवादी प्रतीकों और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने पर अधिक जोर दिया जा रहा है। कई राज्यों में पहले भी स्कूलों में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। पश्चिम बंगाल का यह कदम उसी व्यापक राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा माना जा रहा है, जहां शिक्षा के साथ सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय चेतना को भी जोड़ा जा रहा है।

स्कूल शिक्षा से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि प्रार्थना सभा केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे में ‘वंदे मातरम्’ जैसे राष्ट्रीय गीत छात्रों में सामूहिकता और देश के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत कर सकते हैं।

इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल के हजारों स्कूलों में सुबह की शुरुआत अब ‘वंदे मातरम्’ के साथ होगी। आने वाले समय में यह निर्णय शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में चर्चा का बड़ा विषय बना रह सकता है, खासकर तब जब देशभर में राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है।

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