मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संकट ने अब यूरोप की हवाई यात्रा पर बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है। ताज़ा घटनाक्रम में यूरोपीय संघ (EU) संभावित जेट फ्यूल (एविएशन ईंधन) की कमी से निपटने के लिए एक आपातकालीन योजना तैयार कर रहा है, जिससे आने वाले महीनों में एयर ट्रैवल प्रभावित हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान संकट के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) में तेल आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। यूरोप अपनी जेट फ्यूल जरूरतों का लगभग 75% मध्य पूर्व से आयात करता है, जिससे यह संकट उसके लिए और गंभीर हो गया है।
यूरोपीय अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर वैकल्पिक सप्लाई समय पर नहीं मिली, तो जून तक जेट फ्यूल की कमी शुरू हो सकती है। इसका सीधा असर समर ट्रैवल सीजन पर पड़ेगा, जब हवाई यात्रा अपने चरम पर होती है।
इस स्थिति से निपटने के लिए EU एक व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है। इसमें रिफाइनरी उत्पादन को अधिकतम करना, पूरे यूरोप में रिफाइनिंग क्षमता की मैपिंग करना और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना शामिल है।
हालांकि, समस्या केवल सप्लाई की नहीं है, बल्कि संरचनात्मक भी है। यूरोप के विभिन्न देशों की रिफाइनिंग क्षमता अलग-अलग है—जहां स्पेन जेट फ्यूल का निर्यात करता है, वहीं ब्रिटेन अपनी जरूरत का 60% से अधिक आयात करता है। ऐसे में पूरे महाद्वीप में संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
इस बीच, यूरोप ने अमेरिका से रिकॉर्ड स्तर पर जेट फ्यूल आयात करना शुरू किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरी कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
एयरलाइंस ने भी चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो टिकट की कीमतें बढ़ सकती हैं, उड़ानों में कटौती हो सकती है और कुछ विमानों को ग्राउंड भी करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, ईरान संकट का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं है। एयरलाइंस की लागत बढ़ रही है, बुकिंग पैटर्न बदल रहे हैं और कई कंपनियां पहले से ही घाटे की आशंका जता रही हैं।
यूरोपीय आयोग ने भी चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबा चला, तो यह एक बड़े ऊर्जा संकट में बदल सकता है, जिससे न केवल एयर ट्रैवल बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
कुल मिलाकर, EU का यह इमरजेंसी प्लान केवल एक अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि एक बड़े ऊर्जा संकट से बचने की कोशिश है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह योजना यूरोप को संभावित जेट फ्यूल संकट और हवाई यात्रा में व्यवधान से बचा पाती है या नहीं।