Indore की कन्फेक्शनरी (मिठाई और स्नैक) निर्माण इकाइयों पर वैश्विक आर्थिक और आपूर्ति संकट का गंभीर असर देखने को मिल रहा है। उद्योग से जुड़े निर्माताओं के अनुसार, पिछले कुछ समय में उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) पर दबाव बढ़ गया है।

उद्योग जगत का कहना है कि इस गिरावट का मुख्य कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान है। विशेष रूप से पैकेजिंग सामग्री की लागत में 40 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जिससे उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। इसके अलावा ग्लूकोज, खाद्य सामग्री और एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी ने उद्योग की लागत संरचना को प्रभावित किया है।

वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के कारण सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता और परिवहन लागत दोनों प्रभावित हुए हैं। इसका सीधा असर इंदौर के खाद्य प्रसंस्करण और कन्फेक्शनरी उद्योग पर पड़ा है, जो बड़े पैमाने पर निर्यात और घरेलू बाजार पर निर्भर हैं।

उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा दी हैं, जिसका असर मांग पर पड़ा है। विशेष रूप से ग्रामीण बाजारों में खपत में गिरावट देखी गई है, जहां उपभोक्ता मूल्य संवेदनशीलता अधिक होती है। कीमतें बढ़ने के कारण कई उपभोक्ताओं ने इन उत्पादों की खरीद कम कर दी है, जिससे बिक्री पर दबाव बढ़ा है।

इस स्थिति के चलते कई इकाइयों ने उत्पादन क्षमता को कम कर दिया है और कुछ ने अस्थायी रूप से शिफ्ट भी घटा दिए हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में रोजगार और उत्पादन दोनों पर और अधिक असर पड़ सकता है।

हालांकि, उद्योग प्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि यह स्थिति अस्थायी हो सकती है और वैश्विक हालात सामान्य होने पर मांग और उत्पादन दोनों में सुधार की संभावना है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर लागत नियंत्रण और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश भी की जा रही है ताकि उद्योग को स्थिरता प्रदान की जा सके।

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