भारत में गोल्ड लोन तेजी से लोकप्रिय होते जा रहे हैं और अब यह होम लोन के बाद दूसरा सबसे बड़ा रिटेल क्रेडिट प्रोडक्ट बनकर उभरा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, इस सेगमेंट में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि उपभोक्ता अब पारंपरिक बैंकिंग विकल्पों के अलावा सुरक्षित और त्वरित ऋण विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। गोल्ड लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सोने को गिरवी रखकर तुरंत नकदी प्राप्त की जा सकती है, जिससे यह छोटे व्यवसायों और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए एक पसंदीदा विकल्प बनता जा रहा है।

विशेष रूप से, प्रति खाते औसत बकाया राशि में भी तेज वृद्धि देखी गई है। मार्च 2022 में जहां यह आंकड़ा लगभग ₹1.1 लाख था, वहीं दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹1.9 लाख हो गया है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि गोल्ड लोन अब केवल आपातकालीन जरूरतों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोग इसे बड़े वित्तीय उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि ग्राहकों का भरोसा इस ऋण श्रेणी पर लगातार बढ़ रहा है।

भारत में सोना हमेशा से एक महत्वपूर्ण निवेश और सांस्कृतिक संपत्ति रहा है। ऐसे में, वित्तीय संस्थानों ने इस पर आधारित ऋण उत्पादों को अधिक सुलभ और आकर्षक बना दिया है। बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और आसान प्रक्रिया के जरिए गोल्ड लोन को आम लोगों तक पहुंचाया है। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है, जहां पारंपरिक क्रेडिट सुविधाएं सीमित होती हैं।

गोल्ड लोन की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे एक और कारण इसकी कम जोखिम वाली प्रकृति है। चूंकि यह एक सिक्योर्ड लोन है, इसलिए लेंडर्स के लिए इसमें जोखिम कम होता है और वे अपेक्षाकृत कम ब्याज दरों पर ऋण प्रदान कर सकते हैं। वहीं, उधार लेने वालों के लिए यह बिना ज्यादा दस्तावेजों के आसान और तेज समाधान उपलब्ध कराता है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि गोल्ड लोन का अत्यधिक उपयोग वित्तीय दबाव को बढ़ा सकता है, खासकर यदि उधारकर्ता समय पर भुगतान करने में असमर्थ रहते हैं। ऐसे मामलों में गिरवी रखा गया सोना नीलाम किया जा सकता है, जो कई परिवारों के लिए भावनात्मक और आर्थिक दोनों दृष्टि से नुकसानदायक हो सकता है।

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