भारत-अमेरिका व्यापार पर वियतनाम डील की छाया
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों के बीच वियतनाम के साथ संभावित अमेरिकी व्यापार समझौते को लेकर चिंता जताई जा रही है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि वह इस डील पर गंभीरता से विचार करे और अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए रणनीतिक तैयारी करे। वियतनाम के साथ अगर अमेरिका किसी तरह का मुक्त व्यापार समझौता करता है, तो इससे भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
भारतीय निर्यातकों के लिए बढ़ सकती है चुनौती
GTRI का कहना है कि इस समझौते से वियतनाम को अमेरिका में सस्ती दरों पर उत्पाद भेजने की छूट मिल सकती है, जिससे भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धा घट सकती है। वियतनाम पहले ही कई देशों के साथ व्यापार समझौते कर चुका है और उसका उत्पादन ढांचा मजबूत होता जा रहा है। ऐसे में अगर उसे अमेरिकी बाजार में अतिरिक्त छूट मिलती है, तो वह टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर और कृषि जैसे क्षेत्रों में भारत को पीछे छोड़ सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर
भारत का अमेरिका के साथ करीब 120 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है, जिसमें कपड़ा, रसायन, जेम्स एंड ज्वेलरी और फार्मा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में वियतनाम पहले से ही प्रतिस्पर्धी बना हुआ है और नई डील से उसका प्रभाव और बढ़ सकता है। इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में टिके रहना मुश्किल हो सकता है।
GTRI के सुझाव और भारत की रणनीतिक ज़रूरतें
GTRI ने सुझाव दिया है कि भारत को अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को संतुलित करने के लिए उच्च स्तरीय बातचीत करनी चाहिए। साथ ही भारत को घरेलू स्तर पर अपनी एफटीए नीति, उत्पादन लागत, निर्यात सहायता और लॉजिस्टिक्स सुधार जैसे कदमों पर ध्यान देना होगा ताकि वह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे न रहे।
