पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्क फ्रॉम होम (WFH) अपील का असर अब भारत के कॉरपोरेट सेक्टर में साफ दिखाई देने लगा है। कई बड़ी कंपनियों ने मौजूदा हालात को देखते हुए हाइब्रिड वर्क मॉडल को सबसे बेहतर विकल्प बताया है और कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम तथा ऑफिस वर्क के संतुलित मॉडल पर जोर दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देशवासियों से ईंधन की बचत, गैर-जरूरी यात्रा कम करने और जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की थी। इस अपील का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ते दबाव और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके बाद कई कंपनियों ने अपनी मौजूदा कार्य नीतियों की समीक्षा शुरू कर दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Tata Motors, Mercedes-Benz India, Deloitte, EY और KPMG जैसी कई बड़ी कंपनियां पहले से हाइब्रिड मॉडल अपना रही हैं और फिलहाल उसी व्यवस्था को जारी रखने के पक्ष में हैं। कंपनियों का कहना है कि हाइब्रिड मॉडल कर्मचारियों की उत्पादकता बनाए रखने के साथ-साथ ईंधन की खपत कम करने में भी मदद करेगा।
आईटी सेक्टर में भी हाइब्रिड मॉडल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। NASSCOM ने कहा है कि अधिकांश टेक कंपनियां पहले से ही हाइब्रिड कार्य मॉडल पर काम कर रही हैं और मौजूदा संकट को देखते हुए जरूरत पड़ने पर रिमोट वर्क बढ़ाया जा सकता है।
कॉरपोरेट विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 महामारी के बाद हाइब्रिड वर्क मॉडल कंपनियों के लिए एक स्थायी विकल्प बन चुका है। ऐसे में पश्चिम एशिया संकट जैसी परिस्थितियों में यह मॉडल व्यवसायिक निरंतरता बनाए रखने का सबसे व्यावहारिक तरीका साबित हो सकता है।
हालांकि, सभी सेक्टरों के लिए वर्क फ्रॉम होम संभव नहीं है। मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और फील्ड ऑपरेशन आधारित कंपनियों के लिए पूर्ण WFH लागू करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे सेक्टर्स में कंपनियां केवल गैर-जरूरी यात्रा कम करने और डिजिटल मीटिंग्स बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचता है, तो भारत में और अधिक कंपनियां हाइब्रिड मॉडल की ओर बढ़ सकती हैं। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि कर्मचारियों के लिए लचीलापन और कार्य संतुलन भी बेहतर होगा।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की WFH अपील के बाद भारतीय कंपनियों का हाइब्रिड मॉडल के समर्थन में आना यह दिखाता है कि कॉरपोरेट इंडिया बदलते वैश्विक हालात के अनुसार तेजी से खुद को ढालने के लिए तैयार है।

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