भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर को बड़ा झटका लगा है, जहां निर्यात पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ को माना जा रहा है, जिसने इस उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया है।

उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, United States को होने वाले निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बीते वर्ष की तुलना में अमेरिका को शिपमेंट लगभग 45% घटकर 5.09 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट तब आई जब वॉशिंगटन ने भारतीय उत्पादों पर पारस्परिक टैरिफ लगाए और बाद में 25% अतिरिक्त शुल्क भी लागू कर दिया।

इसका सीधा असर भारत के जेम्स और ज्वेलरी उद्योग पर पड़ा, जो लंबे समय से अमेरिका को अपना प्रमुख निर्यात बाजार मानता रहा है। टैरिफ बढ़ने के कारण भारतीय उत्पाद महंगे हो गए, जिससे उनकी मांग में गिरावट आई और कई ऑर्डर रद्द या स्थगित हो गए।

इस सेक्टर से जुड़े निर्यातकों का कहना है कि टैरिफ लागू होने के बाद कई महीनों तक शिपमेंट बाधित रहे। इससे न केवल राजस्व पर असर पड़ा, बल्कि छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों के लिए भी मुश्किलें बढ़ गईं। खासकर कारीगरों और श्रमिकों की आजीविका पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

उद्योग निकाय Gem and Jewellery Export Promotion Council (GJEPC) के आंकड़े इस गिरावट की पुष्टि करते हैं। परिषद का कहना है कि यदि जल्द ही व्यापारिक बाधाओं को कम नहीं किया गया, तो इस क्षेत्र में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने की जरूरत है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो सके। साथ ही, सरकार को व्यापार समझौतों और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए टैरिफ बाधाओं को कम करने पर ध्यान देना होगा।

इसके अलावा, उद्योग को भी नए डिजाइन, बेहतर गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के माध्यम से अपनी स्थिति मजबूत करने की आवश्यकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स के जरिए नए बाजारों तक पहुंच बनाना भी एक महत्वपूर्ण रणनीति हो सकती है।

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