वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच Jamie Dimon, जो JPMorgan Chase के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, ने चेतावनी दी है कि ईरान में जारी संघर्ष आने वाले समय में महंगाई और ब्याज दरों को और ऊंचा कर सकता है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया पहले से ही ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं से जूझ रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, डिमन ने अपने वार्षिक शेयरधारक पत्र में कहा कि ईरान से जुड़े युद्ध के चलते तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ेगा और केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें ऊंची रखने या और बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे तौर पर ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है, क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम लोगों के खर्च में वृद्धि होगी।
डिमन ने यह भी संकेत दिया कि बाजार अभी इन जोखिमों को पूरी तरह से समझ नहीं पा रहे हैं। उनका कहना है कि निवेशक अक्सर यह मान लेते हैं कि महंगाई धीरे-धीरे कम हो जाएगी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा होना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो यह 1970 और 1980 के दशक जैसी आर्थिक चुनौतियां पैदा कर सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी तक काफी हद तक मजबूत बनी हुई है, जिसमें उपभोक्ता खर्च और निवेश की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इसके बावजूद, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बढ़ते वैश्विक तनाव, जैसे कि ईरान और अन्य क्षेत्रों में संघर्ष, आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इसका असर शेयर बाजार, रियल एस्टेट और कर्ज लेने वाले लोगों पर पड़ेगा। इससे आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी हो सकती है। खासकर विकासशील देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उन्हें पहले से ही उच्च आयात लागत और मुद्रा दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, Jamie Dimon की यह चेतावनी इस बात का संकेत है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने आने वाले जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं। ईरान युद्ध का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा सकता है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों में नई उछाल देखने को मिल सकती है।