अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से अहम बैठक से पहले ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान या तो अमेरिका के साथ “अच्छा समझौता” करे या फिर गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते संकट के बीच यह बयान वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों में हलचल पैदा कर रहा है।
ईरान के साथ जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित समुद्री गतिविधियों के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और एलएनजी व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान द्वारा प्रभावी रूप से जलमार्ग बंद किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और शिपिंग नेटवर्क पर दबाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक में ईरान संकट, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहेंगे। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव बनाकर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में भूमिका निभाए। चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार माना जाता है, इसलिए इस पूरे संकट में उसकी भूमिका अहम मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने भी चेतावनी दी है कि वैश्विक तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं और आने वाले महीनों में दबाव और बढ़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते वैश्विक शेयर बाजारों, मुद्रा बाजार और कमोडिटी सेक्टर पर भी असर देखने को मिल रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका प्रभाव वैश्विक महंगाई, परिवहन लागत और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है। वहीं अमेरिकी प्रशासन पर भी युद्ध की बढ़ती लागत और घरेलू आर्थिक दबाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं।