नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट-पूर्व बातचीत को लेकर गुरुवार को बुनियादी ढांचा और वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ बैठकें करेंगी। वित्त मंत्रालय ने कहा कि विभिन्न पक्षों के साथ अलग-अलग परामर्श बैठकें ऑनलाइन होंगी। मंत्रालय ने Twitter पर लिखा-वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उद्योग, बुनियादी ढांचा और जलवायु क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ पूर्वाह्न और वित्तीय क्षेत्र और पूंजी बाजार के विशेषज्ञों के साथ दोपहर में बैठक करेंगी।
बता दें कि यह नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल और वित्त मंत्री सीतारमण का चौथा बजट है। अगले वित्त वर्ष का बजट ऐसे समय पेश किया जाएगा जब कोविड महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। इससे पहले बुधवार को किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों ने वित्त मंत्रालय को दिये गये बजट-पूर्व ज्ञापन में उत्पादन की वास्तविक लागत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने, डीजल पर अधिक सब्सिडी देने और आनुवंशिक रूप से संवर्धित आर्गेनिज्म (जीएमओ) जैसी नई प्रौद्योगिकियों की अनुमति दिये जाने का सुझाव दिया है।
वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी और भागवत कराड ने वर्चुअल तरीके से कृषि और कृषि प्रसंस्करण उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ पहला बजट-पूर्व परामर्श किया। किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारतीय किसान संघों (सीआईएफए) के मुख्य सलाहकार पी चेंगल रेड्डी ने कहा कि सरकार को कृषि के लिए प्राथमिकता क्षेत्र कर्ज में 25 प्रतिशत की वृद्धि करनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी), जो फसलों की मूल्य नीति के बारे में सरकार की सलाहकार संस्था है, को उत्पादन की वास्तविक लागत का पता लगाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने के लिए स्वायत्त बनाया जाना चाहिए। रेड्डी ने उत्पादकता बढ़ाने के लिए समयबद्ध तरीके से जीएमओ सहित प्रौद्योगिकी को अनुमति देने की बात पर भी जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फसल अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईएसएटी) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विकसित आनुवंशिक प्रौद्योगिकी के लिए तत्काल मंजूरी दिये जाने का समर्थन किया।
सीआईएफए ने यह भी कहा कि श्रमबल की कमी और अधिक मजदूरी लागत को हल करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मनरेगा को सभी कृषि गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए।
