वैश्विक आपूर्ति में आई बाधाओं और बढ़ती कीमतों के बीच भारत सल्फर के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। उद्योग संगठनों की ओर से उठाई गई चिंताओं के बाद यह प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों और आपूर्ति की कमी को लेकर चिंता जताई गई है।

जानकारी के अनुसार, भारत अपनी कुल सल्फर आवश्यकता का आधे से अधिक हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। हर साल करीब 20 लाख मीट्रिक टन सल्फर आयात किया जाता है, जिसमें से लगभग आधी आपूर्ति वेस्ट एशिया क्षेत्र से आती है। हाल ही में इस क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे भारत सहित कई देशों में चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात पर रोक लगाई जाती है, तो इससे घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ेगा, जहां पहले से ही आपूर्ति दबाव में है।

वैश्विक स्तर पर स्थिति और जटिल हो गई है क्योंकि China भी अगले महीने से सल्फ्यूरिक एसिड के निर्यात को सीमित करने की तैयारी कर रहा है। इससे वैश्विक बाजार में सल्फर और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों में और तेजी आने की संभावना है।

सल्फर का उपयोग मुख्य रूप से उर्वरक उद्योग में होता है, जो कृषि उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, यह केमिकल, रबर और मेटल प्रोसेसिंग जैसे कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी इस्तेमाल होता है। ऐसे में इसकी कीमतों में वृद्धि का सीधा असर कई उद्योगों और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि वेस्ट एशिया में तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है। साथ ही, घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और स्टॉक प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में भी कदम उठाने होंगे।

फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है और उद्योग जगत से लगातार बातचीत जारी है। आने वाले समय में इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है, जो घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों को प्रभावित करेगा।

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