टेक दिग्गज एप्पल को अपने ट्रैकिंग डिवाइस AirTag को लेकर बढ़ती कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के खिलाफ 30 से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि AirTag का इस्तेमाल स्टॉकिंग और लोगों की लोकेशन ट्रैक करने के लिए किया जा रहा है।
इन मामलों में शिकायतकर्ताओं का कहना है कि AirTag की डिजाइन और इसकी ट्रैकिंग क्षमता का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे अपराधियों को किसी व्यक्ति की गतिविधियों और लोकेशन पर नजर रखने में आसानी होती है। कई पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना जानकारी के ट्रैक किया गया, जिससे उनकी सुरक्षा और निजता पर गंभीर खतरा पैदा हुआ। ()
AirTag, जिसे एप्पल ने 2021 में लॉन्च किया था, मूल रूप से खोई हुई वस्तुओं को खोजने के लिए बनाया गया था। लेकिन इसके छोटे आकार, सटीक लोकेशन ट्रैकिंग और कम कीमत के कारण इसे गलत उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंकाएं लगातार सामने आती रही हैं। ()
कानूनी मामलों में यह भी दावा किया गया है कि एप्पल को पहले से ही संभावित जोखिमों के बारे में चेतावनी दी गई थी, लेकिन कंपनी ने पर्याप्त सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए। हालांकि, एप्पल ने समय-समय पर सुरक्षा फीचर्स जैसे अलर्ट सिस्टम और एंटी-स्टॉकिंग उपायों को बेहतर बनाने की कोशिश की है। ()
हाल ही में अदालत ने AirTag से जुड़े एक बड़े क्लास-एक्शन मुकदमे को क्लास के रूप में मंजूरी देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रभावित लोगों को अलग-अलग व्यक्तिगत मुकदमे दर्ज करने की सलाह दी गई। इसी के बाद ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर 30 से अधिक हो गई है, जिससे एप्पल की कानूनी स्थिति और जटिल हो गई है। ()
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला टेक कंपनियों की जिम्मेदारी और यूजर सेफ्टी के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। आने वाले समय में इस पर होने वाले फैसले यह तय कर सकते हैं कि भविष्य में इस तरह की तकनीकों के लिए किस तरह के नियम और सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे।
कुल मिलाकर, AirTag से जुड़ा यह विवाद एप्पल के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, जो न केवल कंपनी की छवि बल्कि पूरे टेक उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।