आईटी कंपनी कॉग्निजेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग और बदलते बिजनेस माहौल के चलते बड़े स्तर पर वर्कफोर्स में बदलाव की तैयारी कर रही है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह अपने संचालन को अधिक कुशल बनाने और लागत को नियंत्रित करने के लिए कर्मचारियों की संख्या में कटौती कर सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉग्निजेंट अपने ‘Project Leap’ नामक री-स्ट्रक्चरिंग प्रोग्राम के तहत यह बदलाव कर रही है, जिसका उद्देश्य AI आधारित कार्यप्रणाली को तेजी से अपनाना है। इस योजना के तहत कंपनी अपने ऑपरेशंस को अधिक ऑटोमेटेड और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बनाने पर फोकस कर रही है, जिससे पारंपरिक भूमिकाओं की जरूरत कम हो रही है। ()

कंपनी इस बदलाव के तहत हजारों नौकरियों में कटौती कर सकती है। अनुमान है कि लगभग 4,000 कर्मचारियों पर इसका असर पड़ सकता है, हालांकि अलग-अलग रिपोर्ट्स में यह संख्या और अधिक भी बताई जा रही है। ()

हालांकि, इस छंटनी के साथ-साथ कंपनी नई भर्तियों पर भी ध्यान दे रही है। कॉग्निजेंट का कहना है कि वह 2026 में बड़ी संख्या में फ्रेशर्स को नियुक्त करेगी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी मिड-लेवल भूमिकाओं में बदलाव करते हुए एंट्री-लेवल टैलेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। ()

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक आईटी सेक्टर में AI तेजी से काम करने के तरीके को बदल रहा है। कंपनियां लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए ऑटोमेशन और AI टूल्स को अपना रही हैं, जिससे पारंपरिक नौकरियों पर दबाव बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल कॉग्निजेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे टेक उद्योग में देखने को मिल रहा है। कई बड़ी कंपनियां AI के कारण अपने वर्कफोर्स स्ट्रक्चर को फिर से डिज़ाइन कर रही हैं, जिससे आने वाले समय में नौकरियों की प्रकृति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, कॉग्निजेंट का यह कदम दर्शाता है कि टेक इंडस्ट्री तेजी से AI-ड्रिवन मॉडल की ओर बढ़ रही है। जहां एक ओर पारंपरिक भूमिकाओं में कटौती हो रही है, वहीं दूसरी ओर नई स्किल्स और तकनीकी विशेषज्ञता की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *